Vaitarani River Spiritual Cleansing and Moksha During Malmas गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करेंगे श्रद्धालु, धुल जाएंगे जन्म-जन्मांतर के पाप, Biharsharif Hindi News - Hindustan
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गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करेंगे श्रद्धालु, धुल जाएंगे जन्म-जन्मांतर के पाप

गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने वाले श्रद्धालुओं को जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। राजगीर में मलमास के दौरान वैतरणी नदी का अनुष्ठान मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। पितरों की शांति के लिए पिंडदान की परंपरा भी है। श्रद्धालु देश-विदेश से पवित्र कुंडों में स्नान करने आते हैं।

Fri, 15 May 2026 11:43 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करेंगे श्रद्धालु, धुल जाएंगे जन्म-जन्मांतर के पाप

गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करेंगे श्रद्धालु, धुल जाएंगे जन्म-जन्मांतर के पाप मलमास में वैतरणी नदी पार करने वाले जातकों को होती है मोक्ष की प्राप्ति पवित्र नदी के तट पर पितरों की शांति के लिए पिंडदान करने की भी है परंपरा राजगीर, हिन्दुस्तान टीम।

मलमास के दौरान वैतरणी नदी का महत्व

मलमास के दौरान पौराणिक नगरी राजगीर मोक्ष और पुण्य प्राप्ति का बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है। इस दौरान यहां बहने वाली वैतरणी नदी की महत्ता सर्वोपरि हो जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों में इसे भवसागर पार कराने वाली नदी कहा गया है। मान्यता है कि मलमास के दौरान जब श्रद्धालु राजगीर के पवित्र कुंडों में स्नान करने के बाद गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करते हैं, तो उनके जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। राजगीर के पुरोहितों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में वैतरणी नदी का अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है, जो जातक इस रस्म को पूरी श्रद्धा से निभाते हैं, उन्हें मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं, यह कर्मकांड मनुष्य को 84 लाख योनियों (सहस्र योनियों) के जन्म-मरण के चक्कर और नीच योनियों के भंवर से भी मुक्ति दिलाता है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से राजगीर पधारने वाले श्रद्धालु इस विधान को पूरा करना कभी नहीं भूलते।

पिंडदान का विशेष महत्व

वैतरणी नदी का महत्व सिर्फ मोक्ष के लिए ही नहीं, बल्कि मृत पूर्वजों (पितरों) की मुक्ति के लिए भी बहुत खास है। मलमास के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म इसी नदी के पावन तट पर किए जाते हैं। पंडा समिति के सदस्यों ने बताया कि वैतरणी का महात्म्य इतना व्यापक है कि यहां सिर्फ भारत के विभिन्न राज्यों से ही नहीं, बल्कि अन्य देशों देशों से भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान करने आते हैं।

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