बिहार में शराब तस्करी पर चोट की तैयारी, बैच और QR कोड से सप्लायर का कॉलर पकड़ेगी पुलिस
शराबबंदी कानून के बावजूद बिहार में हर गांव-शहर में दारू बेच रहे तस्करों के नेटवर्क पर चोट की तैयारी में पुलिस शराब की बोतल पर छपे बैच और क्यूआर कोड को हथियार बनाने की तैयारी में है।

बिहार में जमीनी स्तर पर पुलिस और उत्पाद विभाग के जवानों और अधिकारियों की मिलीभगत से शराबबंदी के नौ साल बाद भी राज्य के हर गांव और शहर में शराब बेच रहे तस्करों की नेटवर्क पर एक और चोट करने की तैयारी बड़े अधिकारी कर रहे हैं। मद्य निषेध विभाग की योजना है कि राज्य में जब्त होने वाली शराब की बोतलों पर छपे बैच और क्यूआर कोड से सप्लायरों तक पहुंचा जाए, जिनको उनके राज्यों में शराब कंपनियों से ये बोतलें बेचने के लिए मिली थी। सप्लायर तक पहुंचकर सिस्टम में थोड़ा डर पैदा करने की यह कोशिश कितना रंग लाएगी, ये भविष्य के गर्भ में हैं क्योंकि दुकानदार तो यह कहकर पल्ला झाड़ लेगा कि हमसे जिसने खरीदा, हमने बेच दी।
मद्य निषेध उत्पाद विभाग के आयुक्त रजनीश कुमार सिंह ने सोमवार को विभाग के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि अन्य राज्यों से तस्करी कर बिहार लाई गई जब्त शराब के ब्रांड, बैच और क्यूआर कोड के साथ विवरणी मुख्यालय को भेजी जाये। सभी मद्य निषेध पदाधिकारियों को पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिले के उत्पाद पदाधिकारियों के साथ समन्वय कर अवैध शराब के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। बैठक में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर जमुई, शेखपुरा और नवादा के मद्य निषेध पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।
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बिहार में 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है लेकिन बॉर्डर से लेकर थानों तक तैनात पुलिस और उत्पाद विभाग के जवान और अधिकारियों की जेब गर्म करके शराब तस्कर पड़ोस के उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड ही नहीं दूर-दराज के पंजाब और हरियाणा तक से शराब ला रहे हैं। राज्य में लाखों लोग शराबबंदी कानून के उल्लंघन में गिरफ्तार हुए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी की सरकार बनने पर शराबबंदी खत्म करने का वादा किया है।




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