बिहार चुनाव: किशनगंज में अबतक BJP खाता नहीं खुला, कांग्रेस को AIMIM और जन सुराज से भी चुनौती
विधानसभा में अब तक हुए चुनाव परिणाम में कांग्रेस को सर्वाधिक जीत हुई। हालांकि बीजेपी ने हर बार टक्कर दी। इस बार ओवैसी और प्रशांत किशोर की पार्टी के लोग भी पसीना बहा रहे हैं।

Bihar Election: जड़ता के अंतरविरोधों के बीच नई मिसाल गढ़ना किशनगंज की खासियत रही है। मिजाज, प्राकृतिक बनावट और आबोहवा भी इसे औरों से अलग खड़ा करती है। यहां की मिट्टी जितनी उर्वर है उतना ही चुनावी अखाड़ा भी। किशनगंज विधानसभा में अब तक हुए चुनाव परिणाम में कांग्रेस को सर्वाधिक जीत से यह साबित होता है कि कांग्रेस का किशनगंज विधानसभा मजबूत किला रहा है। लेकिन इस मजबूत किला में सेंध न लगे इसको बचाने के लिए कांग्रेस को आर-पार की लड़ाई इसलिए लड़ना होगा क्योंकि इस सीट पर जीत हार का अंतर पिछले तीन विधानसभा चुनाव में कम वोटों का ही रहा है। भाजपा इस सीट पर जीत तो नहीं सकी है लेकिन कड़ी टक्कर देती रही है।
वर्तमान स्थिति में महागठबंधन से सीट कांग्रेस को मिलने की सर्वाधिक संभावना है, जबकि एनडीए गठबंधन में भाजपा को। एमआईएम भी किशनगंज विस सीट पर जीत के लिए जोर आजमाईश में लगी है। मंगलवार की देर शाम एमआईएम के चीफ व सांसद असदउद्दीन ओवैसी भी किशनगंज पहुंच गये हैं। वहीं जन सुराज पार्टी भी किशनगंज विस अंतर्गत बेलवा में कार्यकर्ता सम्मेलन में भीड़ जुटा कर अपनी उपस्थिति व इरादा साफ कर चुकी है।
सर्वाधिक नौ बार कांग्रेस पार्टी की जीत
किशनगंज (54) विधानसभा में 2020 तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। पहला चुनाव 1952 से लेकर 2020 के 18वें चुनाव तक सर्वाधिक नौ बार कांग्रेस पार्टी की जीत हुई है। जबकि भाजपा एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के डॉक्टर मो. जावेद आजाद से भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह मात्र 264 मतों से मात खा गई थीं। 2010 से दो बार कांग्रेस से विधायक जीते डॉक्टर मो.जावेद आजाद 2019 के लोकसभा आम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत दर्ज कर बिहार से एकलौता संसद निर्वाचित होने का गौरव तो प्राप्त किया लेकिन उनके सांसद निर्वाचित होने पर 2019 में हुए किशनगंज विधानसभा उपचुनाव में अपनी मां को विधानसभा में पहुंचने में नाकाम रहे थे।
उपचुनाव में AIMIM जीती
2019 के किशनगंज विधानसभा उपचुनाव में असदुद्दीन आवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने जीत दर्ज कर बिहार में अपना खाता खोलने में सफल रही थी। एआईएमआईएम पार्टी से कमरुल होदा ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2020 के विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस की वापसी हुई है। 2020 चुनाव में कांग्रेस के वर्तमान विधायक मो. इजहारुल हुसैन जीत दर्ज करने में सफल रहे। उस चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह दूसरे नंबर पर रही थीं तथा निवर्तमान एआईएमआईएम विधायक कमरुल होदा को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा था।
कांग्रेस का मजबूत किला रहा है
इस बार भी किशनगंज सीट पर एनडीए से यह सीट भाजपा को जाने की पूरी संभावना है। कई संभावित प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में जुटे हैं। वहीं जदयू से भी कई संभावित प्रत्याशी उम्मीद लगाये हैं कि यह सीट जदयू को मिल सकती है। लेकिन महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस को जानी तय मानी जा रही है। वजह भी साफ है, कांग्रेस का मजबूत किला रहा है। वहीं किशनगंज विस सीट पर उपचुनाव में एमआईएम को एक बार जीत मिलने के बाद एमआईएम भी इस सीट को दोबारा कब्जा के लिए रणनीति बना रही है। तो जनसुराज पार्टी की भी नजर किशनगंज सीट पर है।
2010 के चुनाव में 262 मत से हारी थी भाजपा की स्वीटी
मुस्लिम बहुल किशनगंज जिले के किशनगंज विधानसभा चुनाव में 2010 से 2020 तक 3 विधानसभा आम चुनाव की एक उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह लगातार दूसरे नंबर पर रही है, 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मो. जावेद आजाद से भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह मात्र 264 मत से हार गई थीं, उसके बाद 2015 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मो. जावेद आजाद से भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह 8609 मत से चुनाव हारी थीं। 2019 के विधानसभा उपचुनाव में एआईएमआईएम उम्मीदवार कमरुल होदा से भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह 10211 मत से मात खाई थीं तथा 2020 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार इजहारुल हुसैन से भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह को मात्र 1381 मत से हार का सामना करना पड़ा।




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