बिहार में मठों की जमीन से हटेगा अवैध कब्जा, अपराधियों का पिंडदान करेंगे; सम्राट चौधरी का ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा लिए सरकार हर कदम उठाएगी। गया जी तो पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। पिंडदान भी होगा। कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गया है। बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी।
बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मठों की जमीन से अवैध कब्जा हटाया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत बोधगया से होगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बोधगया मठ में आयोजित भारतीय परंपरा में धार्मिक समन्वय विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी-सह सांस्कृतिक संचेतना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। धार्मिक समन्वय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में वर्षों से आक्रांता आते रहे हैं। भारत पर प्रहार करते रहे हैं। लेकिन, भारत कभी समाप्त नहीं हुआ।
सनातन समाज के लोग सबसे अधिक सहनशील होते हैं। सीएम इससे पहले गया के विष्णपुद मंदिर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर फल्गु नदी किनारे भ्रमण किया। इसके बाद सीएम सड़क मार्ग से बोधगया पहुंचे। बोधगया मठ पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री महाबोधि मंदिर गए। यहां भगवान बुद्ध की वंदना की। बोधगया मठ में मुख्यमंत्री ने भगवती गद्दी, ठाकुरबाड़ी और भगवान बुद्ध प्रतिमा स्थल पर दर्शन-पूजन किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी थे।
उधर, मुख्यमंत्री ने नालंदा रमेरा में श्री श्री 108 श्री शरण निवास बाबा महतो साहब की जन्मस्थली पर आयोजित राजकीय मेले का उद्धाटन किया। कहा कि आज से 800 वर्ष पहले सिंध प्रांत से आकर एक संत ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। आपसी भाईचारा और मेल-मिलाप की नींव रखी थी।
सुशासन स्थापित करने के लिए अपराधियों का होगा पिंडदान
बोधगया मठ में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा लिए सरकार हर कदम उठाएगी। गया जी तो पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। पिंडदान भी होगा। कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गया है। बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी। सीएम ने कहा कि हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाया जाएगा। जिसमें समस्याओं को लेकर जो भी आवेदन आएंगे उसपर संबंधित अधिकारी 30 दिनों में अपना निर्णय लेंगे। अटकाना, भटकाना और लटकाने की प्रवृत्ति नहीं चलेगी।




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