Farmers Struggle for Water as Bahuar River Flow Disrupted by Kund Ghat Reservoir Project बोले जमुई : 16 वर्षों से खेतों में पानी पहुंचने का इंतजार बरकरार, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
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बोले जमुई : 16 वर्षों से खेतों में पानी पहुंचने का इंतजार बरकरार

सिकंदरा प्रखंड के किसानों का कहना है कि बहुआर नदी की प्राकृतिक धारा रोकने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। कुंड घाट जलाशय योजना के कारण नदी में पानी का प्रवाह बंद हो गया है, जिससे सिंचाई की समस्या बढ़ गई है। 

Thu, 19 Feb 2026 12:11 AMNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बोले जमुई : 16 वर्षों से खेतों में पानी पहुंचने का इंतजार बरकरार

-प्रस्तुति : सुभाष पांडेय

सिकंदरा प्रखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए बहुआर नदी कभी जीवनरेखा मानी जाती थी। नदी का जल नवाबगंज के समीप बने बीयर तक पहुंचता था और वहां से खुटकट, भूल्लो, नवाबगंज, सिकंदरा, अचम्भो, रामडीह, कर्मा, सिझौड़ी, टाल सहित कई गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी उपलब्ध होता था। आगे चलकर यही पानी हलसी प्रखंड के मतासी और घोंघसा तक पहुंचता था। इससे किसानों को वर्ष भर खेती करने में सहूलियत मिलती थी और भूजल स्तर भी संतुलित रहता था। लेकिन कुंड घाट जलाशय योजना के निर्माण के बाद स्थिति बदल गई। बहुआर नदी के उद्गम स्थल पर बांध बनाकर जलाशय तैयार कर दिया गया, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा अवरुद्ध हो गई। परिणामस्वरूप नदी में पहले की तरह पानी का प्रवाह नहीं हो पा रहा है। नवाबगंज के समीप बना बीयर अब पर्याप्त पानी से वंचित है और उससे जुड़े गांवों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा।

सिकंदरा के किसानों का कहना है कि जलाशय बनने के बावजूद उनके खेत प्यासे हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार, सिकंदरा के 14 पंचायतों और लखीसराय प्रखंड के हलसी पश्चिमी क्षेत्र तक बहुआर नदी का पानी अब नहीं पहुंचता। इसका सीधा असर लगभग 50 से 60 हजार लोगों के जीवन पर पड़ा है। कृषि और पेयजल, दोनों ही संकटग्रस्त हो गए हैं। पहले जहां 70 फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था, अब 200 से 250 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। भूजल स्तर में आई यह गिरावट क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी चिंताजनक है।

किसानों का आरोप है कि जलाशय से एक नहर अलीगंज की ओर मथुरापुर से जोड़ दी गई, जबकि सिकंदरा और आसपास के गांवों की ओर समुचित नहर व्यवस्था विकसित नहीं की गई। उनका कहना है कि जो वास्तविक पानी उन्हें मिलना चाहिए था, उसे दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया। इससे बहुआर नदी की चौड़ाई भी धीरे-धीरे सिकुड़ रही है और कई स्थानों पर अवैध कब्जे की स्थिति बनती जा रही है। करीब 50 गांवों में पानी की भारी कमी से हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि प्रभावित हो रही है। जमीन तो पर्याप्त है, लेकिन सिंचाई के अभाव में खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। अधिकांश परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। यदि खेतों तक नियमित पानी पहुंचे, तो किसान वर्ष में तीन फसलें उगा सकते हैं। वर्तमान में गर्मी के मौसम में छोटे-छोटे तालाब भी सूख जाते हैं, जिससे सिंचाई पूरी तरह ठप हो जाती है। योजना के उद्देश्यों में जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादन बढ़ाना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास शामिल है। साथ ही, जलाशय से पर्यटन की संभावनाएं भी विकसित होने की बात कही जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिन किसानों के खेत पहले नदी के प्राकृतिक प्रवाह से सिंचित होते थे, वे अब पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि कुंड घाट जलाशय से एक अलग नहर निकालकर सिकंदरा और उससे जुड़े गांवों तक पानी पहुंचाया जाए, तो समस्या का समाधान संभव है। वे चाहते हैं कि पहले की तरह बहुआर नदी में नियंत्रित जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए, ताकि नवाबगंज बीयर के माध्यम से पुनः सिंचाई व्यवस्था बहाल हो सके। 02जलाशय परियोजना के अधूरे रहने से लोगों में असंतोष भी बढ़ रहा है। कई वर्ष बीत जाने के बाद भी योजना पूरी तरह धरातल पर प्रभावी नहीं हो पाई है। किसानों को उम्मीद थी कि जलाशय बनने से उनकी सिंचाई समस्या दूर होगी, लेकिन वर्तमान स्थिति ने उन्हें निराश किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जलाशय या बांध परियोजना के साथ डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के लिए जल प्रबंधन की समुचित योजना अनिवार्य होती है।

योजना का 91 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है

जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार के अनुसार कुंडघाट जलाशय योजना का 91 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। विभाग का दावा है कि इस योजना से धावाटांड, मथुरापुर, हरिहरपुर, लछुआर, मिश्रीडीह, फतेहपुर, खुटखट, गोखुला, कुमार नवाडीह, नवकाडीह, रबई, बालाडीह और धरसंडा पंचायतों के किसान लाभान्वित होंगे। नहरों के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

शिकायत

बहुआर नदी की प्राकृतिक धारा रोके जाने से सिकंदरा के खेतों तक सिंचाई का पानी पूरी तरह बंद हो गया।

जलाशय से अलीगंज दिशा में नहर बनाई गई, लेकिन सिकंदरा क्षेत्र के लिए समुचित व्यवस्था नहीं की गई।

भूजल स्तर अत्यधिक गिर गया, पहले 70 फीट पर पानी मिलता था, अब 250 फीट पर भी कठिनाई।

हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचाई अभाव में बंजर हो रही, किसानों की आय लगातार घटती जा रही।

परियोजना 91 प्रतिशत पूर्ण बताई जाती है, फिर भी प्रभावित गांवों को वास्तविक लाभ अबतक नहीं मिला।

सुझाव

कुंड घाट जलाशय से अलग नहर निकालकर सिकंदरा और प्रभावित पंचायतों तक नियमित सिंचाई जल पहुंचाया जाए।

बहुआर नदी में नियंत्रित जल प्रवाह बहाल कर नवाबगंज बीयर से पुरानी सिंचाई प्रणाली पुनः चालू की जाए।

जल वितरण की पारदर्शी मॉनिटरिंग कर सभी पंचायतों को समान रूप से लाभ सुनिश्चित किया जाए।

भूजल स्तर सुधार हेतु रिचार्ज संरचनाएं और छोटे चेक डैम बनाकर वर्षा जल संरक्षण बढ़ाया जाए।

किसानों, विभाग और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक कर स्थायी समाधान हेतु समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

इनकी भी सुनें

1 अगर कैनाल पूरब की ओर बनता है तो हम सभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंच जाएगा। महंगी सिंचाई व्यवस्था से खेतों में लहलहाते गेहूं, मकई, सरसों, मटर, साग, सब्जी समेत अन्य फसल पटवन के अभाव में प्रभावित हो रहा है।

अजय कुमार

2 अगर विभाग के द्वारा कुंडघाट डैम का एक केनाल हमारे पंचायत की ओर निकलता है तो हमारे पंचायत के अलावे दर्जनों गांव लाभान्वित होंगे। इस योजना के पूर्ण होने से किसानों की समस्या दूर हो जाएगी।

अजय महतो

3 एक कैनाल बहुआर नदी से पूरब मिलता है तो तीन पंचायत के किसान लाभान्वित होंगें। भूल्लो पंचायत पूरी तरह सिंचित होगा। एक और जहां किसानों को सिचाई सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है।

अर्जुन साह

4 हमारा पंचायत ऐसा है कि हमारे पंचायत के खेतों में ना तो अपर किउल का पानी आ रहा है ना तो कुंडघाट डैम का पानी जिससे किसान काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। लघु सिचाई विभाग का नलकूप अपने बदहाली की आंसू बहा रहा है।

अरूण रजक

5 अगर सरकार और विभाग चाहे तो हम सभी किसानों के खेतों में पटवन के लिए पानी मिल सकता है। हम सभी किसान खुशी से जिंदगी जी सकते हैं। सिंचाई व्यवस्था के अभाव में कृषक पंपसेट से फसलों की सिंचाई करते हैं।

अरविंद कुमार

6 इस कार्य के लिए सिकंदरा विधायक द्वारा भी प्रयास किया जा रहा है। पर यह कब तक पूरा होगा यह तो समय बता पाएगा। प्रयास हो जल्द कार्य पूरा किया जाय जिससे किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना न पड़े।

बसंत महतो

7 डैम का पानी मिलने का किसानों का सपना कब पूरा होगा यह तो समय बताएगा। परंतु इसके लिए हम सभी किसान प्रयास कर रहे हैं। अभी डैम का कार्य 90 प्रतिशत हुआ है। नहर का कार्य जारी है। यह कार्य बहुत तेजी से चल रहा है।

दयानंद महतो

8 सिकंदरा की सभा में सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि 2020 में डैम बनकर पुरी तरह तैयार हो जाएगा। परंतु अभी तक तो नहीं हुआ है। सरकार के उदासीन रवैये के कारण कुंडघाट जलाशय अधर में पड़ा है।

जवाहर महतो

9 डैम निर्माण से बहुआर नदी सूखा पड़ा है। पहले इसमें सालों भर पानी चलता था। हम सभी किसानों के खेतों में पानी आता था। पर जब से कुंड घाट बनना शुरू हुआ तब से पानी बंद हो गया है।

मनोज कुमार महतो

10 किसानों का सपना पूरा होने का समय आ गया है। पर बस कुछ दिनों में हम सभी किसानों के खेतों में कुंडघाट का पानी देखने को मिलेगा।

अगर कैनाल जल्द बना दिया जाए तो पानी आ जाएगा।

पप्पु कुमार

11 बहुआर नदी में पानी रहने से लोगों को राहत मिलेगा। इसके लिए विभाग को हरेक कीमत पर बड़ा नाला बनाना पड़ेगा। पानी नही रहने से लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है जिससे नदी की चौङ़ाई कम होती जा रही हैं।

परशुराम महतो

12 किसानों के द्वारा कई बार विभाग को बताया गया कि हम सभी किसान के खेतों में पानी का बहुत आवश्यकता है। इसके लिए एक कैनाल बहुआर नदी में जोड़ दिया जाए तो नदी का पानी सुखेगा नहीं और हम सभी के खेतों तक आसानी से पहुंच जाएगा।

रामवृक्ष महतो

13 सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। किसानों की आय में सुधार, बेहतर फसल और उत्पादन से क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

श्यामसुंदर महतो

14 नहरों के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिलने से क्षेत्र के भू-जल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है। यहां पानी की समस्या के कारण साल में केवल दो ही फसलें हो पाती हैं। यदि पानी उपलब्ध हो जाए, तो किसान सालभर फसल उगा सकते हैं।

सुचित महतो

15 यह परियोजना बरसात के पानी का संचयन कर सूखे की समस्या का समाधान करेगी, जिससे जल संकट का प्रभावी ढ़ंग से प्रबंधन हो सकेगा। जिले में सिंचाई सुविधा के अभाव में किसान सिर्फ मानसून पर निर्भर रहते हैं।

उमेश महतो

16 रबी के दौरान सिंचाई सुविधा के अभाव में काफी परेशानी होती है। जिले भर में सिंचाई के लिए तालाब की संख्या कम है जिससे परेशानी होती है। योजना के निर्माण से क्षेत्र के किसानों की समस्या दूर होगी।

नंद किशोर महतो

बोले जिम्मेदार

कुंड घाट जलाशय योजना केा पूरा करनें एवं उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए विधान सभा में मामला उठाया गया है। इसके निर्माण पूरा कराने को लेकर विभाग के अधिकारी से बात किया जाएगा।

प्रफुल्ल मांझी, विधायक सिकंदरा

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