Bhabhua jail 210 inmates matric examinee 35 perusing Food and Nutrition course Library also आधे कैदी कर रहे पढ़ाई और ट्रेनिंग, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी; बिहार में एक जेल ऐसा भी, Bihar Hindi News - Hindustan
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आधे कैदी कर रहे पढ़ाई और ट्रेनिंग, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी; बिहार में एक जेल ऐसा भी

जेल की लाइब्रेरी में विषयवार के अलावा कई बड़े लेखकों की ज्ञानवर्द्धक किताबें उपलब्ध हैं। अलग पढ़ाई करने के लिए प्रबंध किया गया है। उपलब्ध कराए गए शैक्षणिक माहौल में बंदी छात्र कोर्स पूरा कर रहे हैं।

Thu, 5 Feb 2026 08:45 PMSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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आधे कैदी कर रहे पढ़ाई और ट्रेनिंग,  स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी; बिहार में एक जेल ऐसा भी

जेल की पाठशाला की बात करें या पाकशाला की। दोनों के लिए समृद्ध प्रबंध किया गया है। पहले शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा कर लें। भभुआ मंडल कारा में 556 बंदी हैं। इनमें 210 बंदी मैट्रिक के परीक्षार्थी हैं। इनकी परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होगी। जबकि छह बंदी 2 फरवरी से शुरू इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रहे हैं। इस कारा में 35 ऐसे बंदी हैं, जो दूरस्थ शिक्षा के तहत खाद्य एवं पोषण प्रमाण पत्र का कोर्स कर रहे हैं।

इन्हें पढ़ाई पूरी करने के लिए गृह विभाग (कारा) द्वारा स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और संसाधनयुक्त पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। लाइब्रेरी में विषयवार के अलावा कई बड़े लेखकों की ज्ञानवर्द्धक किताबें उपलब्ध हैं। अलग पढ़ाई करने के लिए प्रबंध किया गया है। उपलब्ध कराए गए शैक्षणिक माहौल में बंदी छात्र कोर्स पूरा कर रहे हैं। इग्नू द्वारा संचालित खाद्य एवं पोषण प्रमाणपत्र कोर्स न्यूनतम छह माह व अधिकतम दो वर्ष का होता है। यह कोर्स व्यक्ति, परिवार और समुदाय के लिए पोषण, आहार नियोजन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। इस कोर्स को 18 वर्ष आयु पूरी करने के बाद किया जा सकता है। इस कोर्स में स्वास्थ्य के लिए पोषण और कुपोषण से बचाव की जानकारी मिलती है।

कैदियों को रोजगार की ट्रेनिंग

इन बंदियों के जीवन में न सिर्फ शिक्षा की लौ जलाते रहने का प्रबंध किया गया है, बल्कि भविष्य में समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कारा अधीक्षक संदीप कुमार बताते हैं कि कौशल विकास के तहत 26 बंदियों को विभिन्न क्षेत्र में स्वरोजगार देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जब यह बंदी जमानत पर रिहा होकर अपने घर लौटेंगे, तब वह प्रशिक्षित होने के मिले प्रमाण पत्र के आधार पर बैंक से ऋण लेकर रोजगार कर सकते हैं, ताकि वह अपने परिजनों की परवरिश कर सकें।

स्वास्थ्य का खास ख्याल

कारा के बंदियों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का खास ख्याल रखा जाता है। बंदी समय से बेड छोड़ देते हैं। नित्यक्रिया से निपटने के बाद वह व्यायाम, योगासन करते हैं। इन्हें कम तेल व कम मसाला में तैयार सब्जी खाने में दी जाती है। कम तेल में सब्जी पकानेवाली स्टीम मशीन है। मीनू के अनुसार, फल, दूध, अंडा, दाल, सलाद, हरी सब्जी आदि चीजें दी जाती हैं। आधुनिक पाकशाला में समय पर भोजन तैयार करने के लिए रोटी मेकर मशीन, वेजिटेबल कटर उपलब्ध है। हर वार्ड में 50 लीटर का आरओ लगाया गया है, जिससे बंदियों को स्वच्छ पानी मिलता है।

मानसिक तनाव से दूर रखने का इंतजाम

बंदियों के बीच ऑडियो कैसेट से मधुर ध्वनि में मंत्रोचारण एवं संगीत बजाया जाता है। बंदियों ने खुद जेल की दीवार पर आकर्षक पेंटिंग की गई है। रेडियो दोस्ती कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता है। विशेष अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन सबसे बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।

प्रकृति से जोड़ने की सकारात्मक पहल

बंदियों को प्रकृति से जोड़ने का भी सकारात्मक पहल की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 'शीशम कॉरिडोर' विकसित किया गया है। कारा परिसर एवं वार्ड के चारों तरफ विभिन्न प्रजाति के 1500 फूलों के पौधे रोपे हैं। बाग में मखमली घास हैं। परिसर के चारों तरफ लंबे खड़े फलदाल व छायादार वृक्ष हैं। इको-फ्रेंडली जेल परिसर के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।

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