स्लैब टूटने से पुलियों व नालियों में भरा कचरा, दुर्गंध से सांस लेना हुआ मुश्किल
नगरनिगम क्षेत्र में बने नालियों के स्लैब टूट गए हैं, जिससे जनता को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह गड्ढे हैं, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायतें बढ़ रही हैं, और प्रशासन की उदासीनता से स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। लोग मरम्मत की मांग कर रहे हैं।

नगरनिगम क्षेत्र के अधिकांश मोहल्लों में विकास के नाम पर बना गई नालियों का जाल अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गई है। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी गलियों तक, नवनिर्मित नालों और पुल-पुलियों के स्लैब जगह-जगह से टूट चुके हैं। आलम यह है कि जो नाले जल-निकासी के लिए बनाए गए थे, वे अब हादसों का हॉटस्पॉट और बीमारियों का कारण बन रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर की बड़ी आबादी दोहरी मार झेलने को विवश है। शहर के कमलनाथ नगर, खीरी के पेड़ वाली गली, संत जोसेफ स्कूल मार्ग, केपी हाई स्कूल रोड और भोला बाबू कॉलोनी जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थिति भयावह है।
यहां सड़कों के किनारे बने नालों के स्लैब महीनों से टूटे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निम्नस्तरीय निर्माण सामग्री के उपयोग के कारण ये नवनिर्मित स्लैब समय से पहले ही जवाब दे गए। सड़क के बीचोबीच और किनारों पर बने इन गड्ढों में गिरकर आए दिन राहगीर चोटिल हो रहे हैं। विशेषकर रात के अंधेरे में ये खुले नाले किसी जानलेवा जाल से कम नहीं लगते।इन मोहल्लों में दर्जनों कोचिंग सेंटर और स्कूल संचालित होते हैं, जिसके कारण सुबह और शाम छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ रहती है। कई बार साइकिल और पैदल जाने वाले स्कूली बच्चे इन खुले नालों में गिरकर घायल हो चुके हैं। इसके अलावा, तंग गलियों में टूटे स्लैब के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना दूभर हो गया है। वाहनों के टायर इन गड्ढों में फंसने से अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। समस्या केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई के दौरान निगम के कर्मी स्लैब हटाते तो हैं, लेकिन सफाई के बाद उन्हें यथास्थान नहीं रखते। खुले नालों में आसपास के लोग कचरा और प्लास्टिक फेंक रहे हैं, जिससे नालियां पूरी तरह जाम हो चुकी हैं। यह कचरा आने वाले मानसून में भीषण जलजमाव का मुख्य कारण बनेगा। जलजमाव की वजह से पहले ही दो दर्जन से अधिक मोहल्लों में बारिश का पानी घरों के भीतर घुस जाता है, जिससे लाखों की संपत्ति का नुकसान होता है। खुले नालों में सड़ता कचरा और जमा हुआ पानी अब महामारी को आमंत्रण दे रहा है। पूरे क्षेत्र में मच्छरों का जबरदस्त प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन नगर निगम द्वारा न तो नियमित फॉगिंग कराई जा रही है और न ही एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव। शाम होते ही लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। दीपू कश्यप, मिलन श्रीवास्तव, मोहम्मद हारिस, आशीष पटेल, और डॉ. संजय कुमार सहित कई नागरिकों ने बताया कि उन्होंने वार्ड पार्षद से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन नतीजा 'सिफर' रहा। नगरवासियों की मांग है कि मानसून से पहले नगर निगम एक विशेष टीम का गठन करे, जो शहर के सभी नवनिर्मित नालों का निरीक्षण कर टूटे हुए स्लैब की तत्काल मरम्मत कराए। लोगों का कहना है कि सिर्फ नाले बना देना विकास नहीं है, उनका रखरखाव (मेंटेनेंस) करना भी निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते इन 'मौत के कुओं' को नहीं ढका गया, तो आने वाली बारिश बेतिया के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं होगी। शिकायतें:1. लगभग सभी मोहल्ले में नवनिर्मित नाले के पर बना स्लैब टूटा हुआ है। 2. सड़क पर बनी नालियों व नालों के भी स्लैब कई जगहों पर ध्वस्त हो चुके हैं।3. टूटे स्लैब के माध्यम से कचरा नाले में भर जा रहा है। इससे नाला बंद होने के साथ कचरा सड़ने पर दुर्गंध फैल रही है।4. टूटे स्लैब से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। कई बार वे इसमें गिर जाते हैं। 5. नालों में कचरा भरने व सड़ने से उसमें मच्छर पनप रहे हैं। इसके प्रकोप से शहरवासियों का बुरा हाल है।सुझाव: 1. मोहल्लों में सर्वे कराकर टूटे स्लैब का आकलन करना चाहिए और उसकी मरम्मत करनी चाहिए।2. सड़क के नाले व नालियों के स्लैब की मरम्मत होनी चाहिए। ताकि हादसे की आशंका खत्म हो।3. टूटे स्लैब में कचरा डालने वालों पर कार्रवाई हो व नाले की सफाई की जाय।4. खतरनाक जगहों की पहचान कर पहले वहां तत्काल मरम्मत का काम शुरू करना चाहिए।5. नालियों में नियमित रूप से ब्लीचिंग पावडर व दवा का छिड़काव होना चाहिए, ताकि मच्छरों का प्रकोप खत्म हो। बोेले जिम्मेदार:शहर में ज्यादातर मुख्य नालों का निर्माण स्ट्रार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम द्वारा कराया जा रहा है। ऐसे में जो भी खुले नाले हैं वह स्ट्रार वाटर ड्रेनेज सिस्टम के तहत पहले ही बन जाएंगे। वहीं इसके अलावे भी अगर छोटी नालियों या नालों के ऊपर से ढक्कन छूट जाता है तो उसकी शिकायत मिलने पर इसका निर्माण कराया जाएगा। लोग इसकी शिकायत निगम में कर सकते हैं।गरिमा देवी सिकरिया, मेयर नगर निगम
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