बेतिया राज के मंदिरों के पुरोहितों का मानदेय कम, आवास की सुविधा नहीं
बेतिया नगर के पुरोहितों को 1200 से 1800 रुपये के मानदेय पर जीवन यापन करना पड़ रहा है। महंगाई के कारण उन्हें परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है। पुरोहितों ने सरकार से मानदेय बढ़ाने और आवास की सुविधा की मांग की है। बच्चों की शिक्षा और बीमारियों के इलाज में भी कठिनाई हो रही है।

नगर के अलग-अलग मंदिरों व बेतिया राज के सभी मंदिरों में पूजा पाठ करने वाले नगर के पुरोहितों को सिर्फ 1200 से 1800 के मानदेय पर अपना जीवन बसर करना पड़ रहा है। इतनी कम राशि में जीवन बसर करना और परिजनों की आवश्यकता की पूर्ति करना पुरोहित वर्ग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है। सरकार की ओर से मानदेय के नाम पर मिलने वाली राशि से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इतनी कम राशि में बच्चों की पढ़ाई ,शादी विवाह तथा अन्य सामाजिक सरोकार के दायित्व को निभाना मुश्किल हो रहा है। बीमार होने पर परेशानी बढ़ जाती है, क्योंकि आर्थिक तंगी के कारण वे इलाज भी नहीं करा पाते हैं।
यह उद्गार है शहर के उन पुरोहितों का जिनको सरकार की ओर से मानदेय प्रदान किया जाता है। चढ़ावा की राशि से ही परिवार का गुजर बसर करना पड़ता है। बेतिया राज मंदिरों के अध्यक्ष आचार्य उमेश तिवारी, रवींद्र झा, लक्ष्मी प्रसाद, गौरी शंकर प्रसाद, मारकंडे मिश्रा, जटाशंकर उपाध्याय, आचार्य मदन कुमार तिवारी, राजेश कुमार, दीपक पांडे, केदार पांडेय, सुनील शास्त्री, शिव प्रकाश शांडिल्य, राधेश्याम तिवारी, उपेंद्रनाथ मिश्र, उपेंद्र नाथ तिवारी और अश्विनी कुमार पांडे ने बताया कि महंगाई के इस दौर में इतनी कम राशि में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। इस परेशानी का जिक्र करते हुए नगर के पंडितों ने जिला प्रशासन और बेतिया राज प्रशासन से यह मांग की है कि कम से कम उनके मानदेय जो महज 1200 से 1800 रुपए की राशि है उसमें बढ़ोत्तरी की जाए। अधिकांश पंडितों को अभी भी मंदिर परिसर में रहने की किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके कारण उनका प्रतिदिन अपने गांव से पूजा पाठ करने के लिए बेतिया शहर आना पड़ता है। कई बार किराए भाड़े की भी तंगी बनी रहती है। इससे मानसिक प्रताड़ना मिलता है। प्रतिदिन यात्रा कर जिला मुख्यालय पहुंचना एक अत्यंत जोखिम भरा कार्य है, जिससे नगर का पुरोहित वर्ग परेशान है। सरकार से इन पंडितों ने यह मांग किया कि उन्हें आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह सुबह-शाम बेफिक्र होकर पूजा पाठ के कार्य कर सके। नगर में अलग-अलग मंदिरों पूजा पाठ करने वाले पंडित और उनके परिजनों की संख्या फिलहाल 1000 से अधिक है। आर्थिक विपन्नता से गुजर रहे पंडितों ने यह मांग की है कि विशेष अवसरों पर हमें विशेष सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि हम भी आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें और अपने परिजनों के साथ जीवन निर्वाह कर सकें। बताया गया कि अक्सर हमें पूजा पाठ करने के लिए यजमान के द्वारा अपने घर पर बुलाया जाता है। हमें जिला मुख्यालय से बाहर जाने में भी विकट परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। यहां के निजी विद्यालयों में हमारे बच्चों का नामांकन कराना टेढ़ी खीर साबित होता है। नामांकन के समय निजी विद्यालय संचालकों के द्वारा मोटी फीस की मांग की जाती है, जिसकी अदायगी हमारी सक्षमता से बाहर है। पंडित की संख्या और उनके परिजनों की संख्या में बढ़ोतरी तो हो रही है लेकिन उसे अनुपात सरकार द्वारा हमारे कल्याण के लिए कदम नहीं उठाया जा रहा है। शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों का हो दाखिला :नगर के मंदिरों में पूजा पाठ करने वाले पुरोहित और पंडितों को आवास की सुविधा नहीं है। इससे यह समाज मानसिक रूप से काफी परेशान है। बातचीत के क्रम में पुरोहितों ने बताया कि अभी चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुका है। ऐसे में प्रतिदिन उन्हें अपने ग्रामीण इलाके से जिला मुख्यालय स्थित निर्धारित मंदिर में पहुंचकर पूजा पाठ करना पड़ता है। अधिकांश पंडितों को अभी भी मंदिर परिसर में रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके कारण उनका प्रतिदिन अपने गांव से पूजा पाठ करने के लिए बेतिया शहर आना पड़ता है। उन्हें आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि वह सुबह-शाम बेफिक्र होकर पूजा पाठ कर सके। मन शांत होने पर ही पवित्र भाव से पूजा पाठ कराया जा सकता है। नगर में अलग-अलग मंदिरों में पूजा पाठ करने वाले पंडित और उनके परिजनों की संख्या फिलहाल 500 से अधिक है। पुरोहित वर्ग को अपने समाज के स्कूली बच्चों के पठन-पाठन की भी चिंता लगी रहती है। बच्चों के बेहतर भविष्य और शादी ब्याह के लिए हमेशा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। पूजा पाठ करने जिला मुख्यालय आने वाले पंडितों को हमेशा अपने परिजनों की चिंता लगी रहती है। फिलहाल लगभग 25 पुरोहित को ही नगर में निर्धारित किए गए मंदिरों में रहने की सुविधा प्रदान की गई है। शिकायतें:1. आजकल के महंगाई के जमाने में 1200 से 1800 प्रति माह की राशि बहुत कम है। इससे काफी परेशानी होती है। 2. पूजा पाठ के विशेष अवसरों पर भी किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती है। पुरोहितों की स्थित काफी दयनीय है। 3. मंदिरों में रहने की सुविधा सभी को नहीं मिल पाती है। आवास की सुविधा नहीं होने से प्रत्येक दिन आना-जाना पड़ता है।4. जीवन बीमा नहीं रहने पर हम काफी असुरक्षित महसूस करते हैं। बीमा की सुविधा को लेकर पहल होनी चाहिए।5. हमारे बच्चों का शिक्षा के अधिकार के तहत निजी विद्यालय में नामांकन नहीं मिल पाता है।सुझाव: 1. बढ़ती महंगाई को देखते हुए पंडितों को मिलने वाले मानदेय में बढ़ोतरी होनी चाहिए।2. नवरात्र और रुद्राभिषेक के अलावा विशेष अवसरों पर विशेष सुविधा मिलनी चाहिए।3. परिजनों के साथ मंदिर परिसर में आवास की सुविधा मिलनी चाहिए।4. जीवन सुरक्षा की दृष्टि से सरकार की ओर से निशुल्क बीमा की सुविधा मिलनी चाहिए।5. शिक्षण संस्थानों में नामांकन के समय रियायत मिलना चाहिए।।
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