Farmers Suffer as Gokhula Canal in Narakotiaganj Remains Damaged Urgent Repairs Needed छोटी नहर का बांध क्षतिग्रस्त, सैकड़ों एकड़ जलमग्न, मरम्मत की दरकार, Bagaha Hindi News - Hindustan
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छोटी नहर का बांध क्षतिग्रस्त, सैकड़ों एकड़ जलमग्न, मरम्मत की दरकार

नरकटियागंज प्रखंड के गोखुला उप वितरणी नहर की खराब स्थिति ने किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नहर के टूटने से सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी जमा हो जाता है, जिससे रबी और गन्ने की खेती प्रभावित होती है। किसान सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

Sat, 28 March 2026 11:01 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बगहा
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छोटी नहर का बांध क्षतिग्रस्त, सैकड़ों एकड़ जलमग्न, मरम्मत की दरकार

नरकटियागंज प्रखंड के पूर्वी हिस्से में स्थित गोखुला उप वितरणी नहर किसानों के लिए अभिशाप बन गई है। करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए निर्मित यह नहर चनपटिया सेंटर से बेलवनिया तक जाती है। नरकटियागंज प्रखंड की कुकुरा, केसरिया, रखही चम्पापुर, गोखुला व भेड़िहरवा पंचायतों के खेतों की सिंचाई इस नहर से होती थी। यह नहर वर्ष 1986 में भीषण बाढ़ में टूट गई थी। उक्त बाढ़ में नहर के दोनों किनारे जगह जगह टूट गए किंतु आज तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। करीब 12 किलोमीटर लंबी इस उप वितरणी में चम्पापुर के समीप निर्मित सायफन बाढ़ में ध्वस्त हो गया।

आज तक सायफन को भी दुरुस्त नहीं किया जा सका है। ध्वस्त सायफन की जगह एक ह्यूपाइप लगा दिया गया है, जो अक्सर जाम हो जाता है और उप वितरणी के टूटे किनारों से पानी खेतों में फैल जाता है। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि इसके आगे के खेत सूखे के शिकार हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर सैकड़ों एकड़ खेत पानी में डूब जाते हैं। इस परेशानी को लेकर हजारों किसान लंबे समय से उप वितरणी को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं, किंतु अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। अपनी मांगों को लेकर किसान विभागीय मंत्री से लेकर त्रिवेणी नहर के अधिकारियों को दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं। पिछले चार दशक में किसानों ने आधा दर्जन बार मनियारी एसडीओ कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन भी किया है। किंतु नतीजा शून्य है। देखभाल के अभाव में नहर का कई जगहों पर अतिक्रमण भी होने लगा है। किसान बताते हैं कि नरकटियागंज प्रखंड की करीब आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के किसानों के लिए कभी यह नहर वरदान थी। करीब 12 किलोमीटर लंबी इस नहर से 50 से अधिक गांवों के किसान लाभान्वित होते थे। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने नहर को किसानों के लिए अभिश्राप बना दिया है। विचंडी पंडित, फूलमती देवी, एकबाली महतो, गुलशन खातून, छोटेलाल राम, भजन राम आदि किसानों ने बताया कि हर वर्ष उन्हें विभाग द्वारा बरसात के पहले नहर को दुरुस्त करने का आश्वासन दिया जाता है। किंतु कई बरसात बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। गौरतलब है कि नरकटियागंज के उत्तरी दिशा से दो नहरें निकलती हैं। इसमें से एक त्रिवेणी नहर है तो दूसरी दोन नहर। वाल्मीकिनगर से निकली यह नहर अंतरराष्ट्रीय भी है। इससे भारतीय क्षेत्र के साथ-साथ नेपाल में जलापूर्ति होती है। हालांकि उप वितरणियों के कहीं ध्वस्त होने तो कहीं जर्जर होने के कारण जिले की महत्वपूर्ण इन दोनों नहरों का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। नरकटियागंज शहर के मध्य से गुजरने वाली साठी बेलवा नहर का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कम इस्तेमाल हो रहा है। नगर परिषद क्षेत्र के लोग गंदगी फेंकने के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। नरकटियागंज व लौरिया प्रखंड के किसानों के लिए साठी बेलवा नहर महज दिखावे का रह गया है। प्रशासन की अनदेखी से जलस्त्रोत वाले इन नहरों का स्तित्व अब संकट में है। पानी लगने से रबी और गन्ने की नहीं हो पाती है खेती, किसान परेशान:किसानों ने बताया कि उप वितरणी के ध्वस्त होने से सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी जमा हो जाता है। इससे रबी और गन्ने की खेती नहीं हो पाती है। मुश्किल से धान की खेती किसान कर पाते हैं। रबी फसल की बुआई के समय खेतों में पानी जमा रहता है। लगातार पानी जमा रहने के कारण गन्ने की खेती नहीं हो पाती है। यदि उपवितरणी को दुरुस्त कर दिया जाय तो सैंकड़ों एकड़ में किसान खेती कर पाएंगे। उपवितरण घ्वस्त स्थल से आगे पानी नहीं पहुंचता है, वहां के किसान खेती करने के लिए कृत्रिम साधनों का उपयोग करते हैं। किसानों का कहना है कि कृत्रिम साधन महंगा है जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है।शिकायतें: 1.नहर के ध्वस्त होने से सारा पानी वहीं आसपास के सैंकड़ों एकड़ खेत में फैल जाता है। इससे उसमें खेती नहीं होती है। 2.नहर ध्वस्त वाले स्थान से पानी आगे नहीं बढ़ता है। इससे आगे के खेत सूखे रह जाते हैं। पंपिंगसेट से पटवन महंगा पड़ता है। 3.जलजमाव के कारण रबी और गन्ने की खेती किसान नहीं कर पा रहे हैं। नजर के सामने खेत पड़ा हुआ है। 4.बारंबार बोरिंग से खेतों की सिंचाई करने पर किसानों को खेतों के बंजर होने की चिंता सताती है।5. साठी-बेलवा नहर में कचरा फेंक कर लोगों ने इसके स्तित्व पर संकट ला दिया है। इससे जलस्त्रोत खत्म हो रहे हैं।सुझाव: 1. गोखुला माइनर में पानी की समुचित आपूर्ति होने से डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को लाभ होगा। 2. उप वितरणी के दोनों किनारों को दुरुस्त कर पानी की आपूर्ति करने से खेतों में जलजमाव नहीं होगा। 3. जलापूर्ति से किसान धान समेत रबी अथवा गन्ने की खेती कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।4. नहर की व्यवस्था दुरुस्त होने पर स्थानीय स्तर पर मजदूरों को काम मिलेगा और पलायन पर रोक लगेगी। 5. बेलवा-साठी नहर में कचरा फेंकने पर रोक लगे। इसकी समय समय पर सफाई होनी चाहिए। बोले जिम्मेदार:गोखुला छोटी नहर समेत नरकटियागंज की सभी माइनरों की दुर्गति को लेकर विधानसभा में सवाल उठाये हैं। सरकार की ओर से जवाब में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी नहरों को दुरुस्त कराया जाएगा। वहीं सिंचाई के लिए निर्मित पईन आदि का जीर्णोद्धार डीडीसी स्तर से कराया जाएगा। उनकी कोशिश रहेगी कि किसानों की खेती सही ढंग से हो। इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। -संजय कुमार पाण्डेय, विधायक नरकटियागंज

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