Anand Mohan Son Anshuman Anand likely to fight assembly election from Nabinagar seat on BJP ticket Lovely Chetan in JDU आनंद मोहन के दोनों बेटे लड़ेंगे चुनाव? शिवहर से फिर चेतन, नबीनगर से अंशुमान आनंद, Bihar Hindi News - Hindustan
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आनंद मोहन के दोनों बेटे लड़ेंगे चुनाव? शिवहर से फिर चेतन, नबीनगर से अंशुमान आनंद

बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन के दूसरे बेटे अंशुमान आनंद के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज है। अंशुमान को नबीनगर से बीजेपी टिकट दे सकती है। अंशुमान की मां और जेडीयू सांसद लवली आनंद पहली बार नबीनगर से ही विधायक बनी थीं।

Fri, 10 Oct 2025 08:04 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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आनंद मोहन के दोनों बेटे लड़ेंगे चुनाव? शिवहर से फिर चेतन, नबीनगर से अंशुमान आनंद

बिहार में सवर्णों की राजनीति से चमके बाहुबली नेता आनंद मोहन के परिवार के अच्छे दिन आ गए हैं। पत्नी और एक बेटे को सांसद और विधायक बनाने के बाद आनंद मोहन अब दूसरे बेटे अंशुमान आनंद को औरंगाबाद जिले की नबीनगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं। लवली पहली बार नबीनगर से विधायक बनी थीं और 1996 में एमएलए बनने से पहले ही 1994 में वैशाली सीट से उप-चुनाव जीतकर सांसद बनी थीं। अंशुमान आनंद को लेकर चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर वो नबीनगर से लड़ सकते हैं। अंशुमान के भाई चेतन आनंद शिवहर से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर लड़ सकते हैं।

आनंद मोहन के परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी लवली आनंद और एक बेटे चेतन आनंद राजनीति में स्थापित हो चुके हैं। लवली आनंद शिवहर सीट से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की एमपी हैं। एक बेटा चेतन आनंद शिवहर विधानसभा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नाम पर विधायक हैं, लेकिन जेडीयू के साथ हैं। जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 2024 में महागठबंधन छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ सरकार बनाने पर चेतन ने फ्लोर टेस्ट में राजद का साथ छोड़ दिया था।

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आनंद मोहन 1990 में पहली बार सहरसा जिले की महिषी सीट से विधायक बने थे और तब उस इलाके में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से अपने झगड़े को लेकर अगड़ों के नेता के तौर पर उभरे थे। 1996 और 1998 में दो बार वो शिवहर लोकसभा सीट से सांसद बने। मुजफ्फरपुर में गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की 1994 में मॉब लिचिंग केस में फंसने के बाद आनंद और उनके परिवार पर राजनीतिक संकट छा गया। 2005 में लवली जेडीयू के टिकट पर बाढ़ सीट से एक बार जीतीं लेकिन वह विधानसभा कुछ महीने में ही भंग हो गई।

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लवली आनंद उसके बाद दलदबल कर कई दलों के टिकट पर चुनाव लड़ीं लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। 2020 के विधानसभा चुनाव में लवली लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ हो गईं। राजद ने लवली को सहरसा और उनके बेटे चेतन आनंद को शिवहर से लड़ाया। बेटा जीत गया, मां हार गईं।

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2023 में नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार ने जेल नियमों में बदलाव किया, जिसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता खुला। तब से आनंद मोहन नीतीश के गुणगान में लगे रहे और जब 2024 में नीतीश ने पाला बदला तो बेटे चेतन भी तेजस्वी को छोड़ जेडीयू के साथ हो गए।

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