अल्लाह के सिवाय किसी से न डरें; मुसलमानों से संवाद करने निकल पड़े प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमानों को साधने के लिए बिहार बदलाव इजलास अभियान की शुरुआत की है। गयाजी में बुधवार को कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने मुसलमानों को अल्लाह के सिवाय किसी से नहीं डरने का संदेश दिया।

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने मुसलमानों से संवाद शुरू कर दिया है। प्रशांत किशोर ने बाराचट्टी विधानसभा के चेरकी में 'बिहार बदलाव इजलास' में मुसलमानों से कहा कि वे अल्लाह के सिवाय किसी से न डरें। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर तंज कसते हुए कहा कि मुस्लिम समाज के लोगों ने आज तक लालटेन का तेल बनकर खुद को जलाया है, लेकिन अब वक्त है कि वह अपनी रोशनी खुद बनें।
प्रसांत किशोर ने दावा किया कि बिहार में दलितों के बाद सबसे अधिक गरीब मुसलमान हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गांवों में साफ दिखती है। इस बदहाली के लिए बाहर वालों से ज्यादा खुद मुसलमान समुदाय जिम्मेदार है। क्योंकि वह अपने लोगों में से नेता नहीं चुनते। पीके ने कहा, “जब तक आप अपनी आवाज को ताकत नहीं देंगे। तब तक आपका प्रतिनिधित्व नहीं होगा। आप तादाद की चिंता छोड़िए और अपने हक की बात कीजिए। ऐसे लोगों को नेता बनाइए जो वाकई आपकी बात करें, ना कि चुनाव के वक्त ही दिखें।”
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी जन सुराज की यात्रा से अब तक करीब सवा करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय की है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा आप भीड़ का हिस्सा न बनें और निर्णायक की भूमिका में आएं। पीके ने कहा, "आपने भाजपा, मोदी-योगी, यूसीसी-एनआरसी सब देख लिया है। अब डरने की कोई वजह नहीं है।"
देश की आधी हिंदू आबादी भाजपा को समर्थन नहीं करती- पीके
प्रशांत किशोर ने भाजपा को हराने की रणनीति पर बात करते हुए कहा कि देश की आधी हिंदू आबादी भाजपा को समर्थन नहीं करती। 40 प्रतिशत हिंदू भाजपा के साथ हैं। बाकी लोग गांधी, लोहिया, अंबेडकर और समाजवादी विचारधारा को मानने वाले हैं। अगर इनका साथ मुस्लिम समाज दे तो भाजपा की हार तय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज पार्टी मुस्लिम समाज को उनकी आबादी के अनुसार चुनावी प्रतिनिधित्व देगी। साथ ही कहा कि यह लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं है, बिहार को बदलने की है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से आह्वान किया कि वे इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि इतिहास में यह दर्ज हो कि बिहार की नई दिशा गढ़ने में मुस्लिम समाज ने भी अपना खून-पसीना बहाया।
'बिहार को नया रास्ता देने में निर्णायक भूमिका निभाएं'
पीके ने कहा कि हम चाहते हैं कि जब बिहार के बदलाव की कहानी लिखी जाए तो उसमें सिर्फ यह न हो कि मुस्लिमों को 40 सीटें दी गई। बल्कि यह भी लिखा जाए कि मुस्लिम समाज ने बिहार को नया रास्ता देने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम बुद्धिजीवी, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बता दें कि मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए प्रशांत किशोर ने बिहार के 5 जिलों में मुसलमान शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और जन प्रतिनिधियों से संवाद की शुरुआत की। गयाजी के चेरकी के बाद गुरुवार को दरभंगा के मुरिया और बेगूसराय के तेघड़ा में उनका कार्यक्रम होगा। इसके बाद 27 सितंबर को वे भागलपुर के शाह जंगी और 28 को मुजफ्फरपुर जिले के कांटी में मुसलमानों से संवाद करेंगे।




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