vedic astrology delay in marriage causes grah dosha and upay shani rahu ketu mangal shanti ज्योतिष शास्त्र: विवाह में देरी होने के पीछे क्या कारण है? जानें ग्रह दोष और उसके उपाय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

ज्योतिष शास्त्र: विवाह में देरी होने के पीछे क्या कारण है? जानें ग्रह दोष और उसके उपाय

विवाह में देरी क्यों हो रही है? वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि, राहु, केतु, मंगल दोष और कमजोर सप्तम भाव विवाह में अड़चनें डालते हैं। जानिए कुंडली में विवाह देरी के मुख्य ग्रह दोष और उन्हें दूर करने के प्रभावी ज्योतिषीय उपाय।

Sat, 4 April 2026 11:11 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
ज्योतिष शास्त्र: विवाह में देरी होने के पीछे क्या कारण है? जानें ग्रह दोष और उसके उपाय

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के ग्रहों की स्थिति, भावों और योगों के आधार पर विवाह के योगों का विश्लेषण किया जाता है। कई बार सर्वगुण संपन्न व्यक्ति के विवाह में अड़चनें या देरी आ जाती है। इसके पीछे मुख्य रूप से सप्तम भाव, विवाह कारक ग्रहों (शुक्र, गुरु) और अशुभ ग्रहों (शनि, राहु, केतु, मंगल) की स्थिति जिम्मेदार होती है। शनि देरी का ग्रह माना जाता है, जबकि राहु-केतु भ्रम और अचानक बाधाएं पैदा करते हैं। मंगल दोष भी विवाह में रुकावट डालता है। आइए जानते हैं विवाह में देरी के प्रमुख ज्योतिषीय कारण और उनके उपाय।

कुंडली में विवाह का महत्वपूर्ण सप्तम भाव

वैदिक ज्योतिष में कुंडली के 12 भावों में सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का मुख्य भाव माना जाता है। यह लग्न (प्रथम भाव) से ठीक विपरीत होता है और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि सप्तम भाव पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो, सप्तमेश कमजोर हो या पाप ग्रहों से घिरा हो, तो विवाह में देरी या बाधाएं आती हैं। सप्तम भाव का स्वामी यदि छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो या अशुभ प्रभाव में हो, तो विवाह योग में रुकावट पड़ती है। ज्योतिषी कुंडली का अध्ययन कर सप्तम भाव की स्थिति देखते हैं।

शनि ग्रह: विवाह में देरी का प्रमुख कारण

शनि को ज्योतिष में देरी, अनुशासन और कर्मफल का ग्रह माना जाता है। इसकी मंद गति के कारण विवाह जैसे महत्वपूर्ण घटनाओं में विलंब होता है। जब शनि सप्तम भाव, सप्तमेश या लग्न को प्रभावित करता है, तो विवाह में देरी होती है। सिंह और कर्क लग्न वाले जातकों में शनि का प्रभाव अक्सर विवाह को टालता है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान भी विवाह में अड़चनें बढ़ सकती हैं। शनि व्यक्ति को परिपक्वता सिखाता है, इसलिए देरी के बाद विवाह स्थिर और दीर्घकालिक होता है।

राहु-केतु और मंगल दोष का प्रभाव

राहु और केतु छाया ग्रह विवाह में भ्रम, अस्थिरता और अचानक बाधाएं पैदा करते हैं। यदि सप्तम भाव में राहु या केतु हो, या वे सप्तमेश को प्रभावित करें, तो विवाह में देरी या बार-बार रिश्ते टूटने की संभावना रहती है। कालसर्प दोष भी विवाह बाधा का बड़ा कारण बनता है।

मंगल दोष (मांगलिक दोष) तब बनता है जब मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो। इससे विवाह में अड़चनें, विवाद या देरी होती है। मंगल की उग्र ऊर्जा वैवाहिक सुख में बाधा डालती है।

शुक्र और गुरु ग्रह की कमजोर स्थिति

शुक्र विवाह का मुख्य कारक ग्रह है। पुरुष की कुंडली में शुक्र पत्नी का कारक होता है, जबकि स्त्री की कुंडली में गुरु पति का। यदि शुक्र कमजोर, पीड़ित या अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो विवाह में देरी होती है। गुरु का कमजोर होना भी विवाह और वैवाहिक सुख दोनों में बाधा डालता है। शुक्र पर शनि, राहु या मंगल की दृष्टि विवाह को और टाल सकती है। इन ग्रहों की मजबूती विवाह के शुभ योग बनाती है।

अन्य ज्योतिषीय योग और कारण

कुंडली में कुछ विशेष योग भी विवाह में देरी पैदा करते हैं, जैसे लग्नेश का 12वें भाव में होना, सप्तमेश का अष्टमेश से परिवर्तन योग, गुरु चांडाल योग आदि। अष्टम भाव का विश्लेषण भी जरूरी है, क्योंकि यह आयु, रहस्य और अचानक घटनाओं से जुड़ा है। यदि अष्टमेश सप्तम भाव को प्रभावित करे तो विवाह में रुकावट आती है। कुछ मामलों में दशा-अंतर्दशा (विशेषकर शनि या राहु की) भी विवाह को टालती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:Vastu Tips: वास्तु दोष से राहत के लिए किस धातु का हाथी घर में रखना चाहिए?

विवाह बाधा दूर करने के प्रभावी उपाय

विवाह बाधा दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपाय बहुत कारगर सिद्ध होते हैं। शनि दोष के लिए शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें। मंगल दोष शांत करने के लिए हनुमान जी को चोला चढ़ाएं या मंगलवार व्रत रखें।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:इन लोगों पर मेहरबान रहते हैं शनि देव, शनि दोष का भी नहीं पड़ता है गलत प्रभाव

शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को सफेद वस्त्र धारण करें, मिठाई और सफेद फूल चढ़ाएं। महिलाएं गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर बृहस्पति मंत्र जप करें। शिव पूजा, सोमवार को शिवलिंग पर दूध-अभिषेक और हनुमान चालीसा पाठ से भी ग्रह शांति होती है और विवाह योग सक्रिय होता है। कुंडली विश्लेषण कर विशेषज्ञ ज्योतिषी से रत्न धारण करने की सलाह लें। दान-पुण्य और अच्छे कर्म भी ग्रह दोष को कम करते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:Kalashtami 2026: वैशाख माह की कालाष्टमी कब है? भूलकर भी ना करें ये काम

इन कारणों और उपायों को समझकर विवाह में आ रही देरी को कम किया जा सकता है। कुंडली का सही विश्लेषण और समय पर उपाय से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!