vastu shastra how to check plot is shubh or not before building house Vastu Shastra: मकान बनवाने के लिए जमीन शुभ है या नहीं, ऐसे करें जांच, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Vastu Shastra: मकान बनवाने के लिए जमीन शुभ है या नहीं, ऐसे करें जांच

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं होती, बल्कि उसमें सूर्य की किरणें, पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र, जल स्तर और दिशाओं की ऊर्जा काम करती है।

Fri, 27 Feb 2026 05:45 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Vastu Shastra: मकान बनवाने के लिए जमीन शुभ है या नहीं, ऐसे करें जांच

मकान बनाना जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। व्यक्ति अपनी सारी कमाई और मेहनत का बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च करता है। लेकिन अगर जमीन शुभ न हो तो बार-बार परेशानियां, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और परिवार में अशांति आ सकती है। वास्तु शास्त्र में जमीन की जांच के लिए बहुत सरल और प्राचीन विधियां बताई गई हैं। इन विधियों से पहले ही पता चल जाता है कि वह जमीन सुख-समृद्धि देगी या परेशानी। आइए जानते हैं जमीन जांचने के मुख्य तरीके और नियम।

वास्तु शास्त्र में जमीन की जांच क्यों जरूरी है

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं होती, बल्कि उसमें सूर्य की किरणें, पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र, जल स्तर और दिशाओं की ऊर्जा काम करती है। अगर जमीन में नकारात्मक ऊर्जा या दोष हो, तो वहां बने घर में परिवार को बार-बार बीमारी, आर्थिक हानि, झगड़े और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन की जांच नहीं करने से ग्रहदशा भी प्रतिकूल हो जाती है और जीवन में बड़े संकट आ सकते हैं। इसलिए निर्माण से पहले जमीन का परीक्षण अनिवार्य है।

1. गड्ढा जांच विधि - सबसे सरल और प्राचीन परीक्षण

यह विधि सबसे पुरानी और आसान है। जिस जमीन पर मकान बनाना हो, वहां अपनी कोहनी से कनिष्ठा (छोटी) उंगली तक की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का एक गड्ढा खोदें। फिर उसी मिट्टी को वापस उसी गड्ढे में भर दें।

  • अगर मिट्टी भरने के बाद थोड़ी-बहुत मिट्टी शेष बच जाए तो वह जमीन बहुत शुभ मानी जाती है। वहां मकान बनवाने से धन, समृद्धि, सुख और ऐश्वर्य बढ़ता है।
  • अगर मिट्टी भरने के बाद थोड़ी कम रह जाए तो वह जमीन मध्यम फलदायी होती है। वहां रहने से धन की हानि या आर्थिक रुकावट हो सकती है।
  • अगर मिट्टी ठीक-ठीक भर जाए और न कम हो न ज्यादा तो जमीन सामान्य फलदायी मानी जाती है।

यह विधि वास्तु ग्रंथों में बहुत पुरानी बताई गई है और आज भी प्रयोग की जाती है।

2. जमीन की मिट्टी और रंग जांच

वास्तु में जमीन की मिट्टी का रंग भी बहुत महत्वपूर्ण है।

  • सफेद या हल्की पीली मिट्टी – सबसे शुभ, धन-धान्य और सुख देती है।
  • लाल या गहरी लाल मिट्टी – मध्यम फलदायी, परिश्रम से सफलता मिलती है।
  • काली मिट्टी – सामान्य से कम फलदायी, स्वास्थ्य और धन में रुकावट आ सकती है।
  • धूसर या राख जैसी मिट्टी – अशुभ, वहां मकान बनाने से हमेशा परेशानी रहती है।

मिट्टी को हाथ में लेकर सूंघने पर भी जांच की जाती है। अच्छी मिट्टी सुगंधित और हल्की होती है। भारी, बदबूदार या चिपचिपी मिट्टी अशुभ मानी जाती है।

3. दिशा, ढाल और आसपास का वातावरण जांचें

वास्तु में जमीन की दिशा और ढाल बहुत महत्व रखती है। उत्तर या पूर्व की ओर ढाल वाली जमीन सबसे शुभ मानी जाती है। दक्षिण या पश्चिम की ओर ढाल वाली जमीन मध्यम फलदायी होती है। जमीन समतल हो तो भी ठीक है, लेकिन चारों ओर ऊंची जमीन से घिरी हो तो अशुभ। अगर जमीन के पास कुआं, नाली, कब्रिस्तान, अस्पताल, श्मशान या टूटी-फूटी इमारतें हों, तो वह जमीन अशुभ मानी जाती है। जमीन के आसपास हरा-भरा वृक्ष, तालाब या खुला मैदान हो तो बहुत शुभ होता है।

4. वैज्ञानिक और वास्तु दृष्टि से महत्वपूर्ण बातें

वास्तु शास्त्र केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। सूर्य की किरणें, पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र और भौगोलिक स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।

  • उत्तर-पूर्व दिशा में खुलापन हो तो सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • दक्षिण-पश्चिम में भारी निर्माण हो तो स्थिरता मिलती है।
  • जमीन पर पानी का जमाव या नमी ज्यादा हो तो अशुभ।
  • जमीन में लोहा, पत्थर या कंकड़ ज्यादा हों तो वहां निर्माण से पहले मिट्टी बदलनी चाहिए।

वास्तु में जमीन जांच के बाद ही नींव डालना चाहिए। अगर जमीन अशुभ हो तो उपाय करके ही निर्माण करें।

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अशुभ जमीन के उपाय और सावधानियां

अगर जमीन जांच में मध्यम या अशुभ निकले तो निराश ना हों। वास्तु में इसके उपाय हैं:

  • जमीन पर गंगाजल और दूध का छिड़काव करें।
  • हवन और यज्ञ करवाकर जमीन शुद्ध करें।
  • वास्तु पूजन और भूमि पूजन विधिवत करवाएं।
  • जमीन के चारों कोनों में हवन कुंड बनाकर अग्नि जलाएं।
  • पांचों तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का संतुलन बनाए रखें।

जमीन शुभ हो तो भी वास्तु नियमों का पालन करें। इससे घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है।

जमीन जांच वास्तु का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। थोड़ी सी सावधानी से जीवन भर का सुख सुनिश्चित किया जा सकता है। मकान बनवाने से पहले हमेशा वास्तु विशेषज्ञ से जांच जरूर करवाएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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