never make roti from stale leftover dough is inauspicious causes money loss गूंथे हुए बासी आटे की रोटी बनाने से क्या होता है? जानिए इसके अशुभ प्रभाव
More

गूंथे हुए बासी आटे की रोटी बनाने से क्या होता है? जानिए इसके अशुभ प्रभाव

हिंदू धर्म में रसोई को मां अन्नपूर्णा का मंदिर माना जाता है। यहां बनने वाला हर निवाला सिर्फ भोजन नहीं, प्रसाद होता है। इसलिए रोटी बनाते समय शुद्धता और नियमों का पालन बहुत जरूरी है। हमारे शास्त्रों और वास्तु में साफ लिखा है कि बासी गूंथा हुआ आटा इस्तेमाल करना अशुभ होता है।

Fri, 12 Dec 2025 03:13 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
गूंथे हुए बासी आटे की रोटी बनाने से क्या होता है? जानिए इसके अशुभ प्रभाव

हिंदू धर्म में रसोई को मां अन्नपूर्णा का मंदिर माना जाता है। यहां बनने वाला हर निवाला सिर्फ भोजन नहीं, प्रसाद होता है। इसलिए रोटी बनाते समय शुद्धता और नियमों का पालन बहुत जरूरी है। हमारे शास्त्रों और वास्तु में साफ लिखा है कि बासी गूंथा हुआ आटा इस्तेमाल करना अशुभ होता है।

बासी आटे में तामसिक ऊर्जा

रात में गूंथा आटा सुबह तक बासी हो जाता है। इसमें खमीर उठता है और तामसिक गुण बढ़ जाता है। गरुड़ पुराण और धर्मसिंधु में लिखा है कि बासी भोजन ग्रहण करने से मन में नकारात्मकता, आलस्य और क्रोध बढ़ता है। जब हम बासी आटे की रोटी खाते हैं, तो यह तामसिक ऊर्जा हमारे शरीर और मन में प्रवेश कर जाती है। घर का वातावरण भारी हो जाता है और मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं।

मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा हो जाती हैं नाराज

वास्तु और धर्म ग्रंथों में साफ कहा गया है कि बासी आटा रखना धन की देवी लक्ष्मी को अपमान करने के समान है। रात का बचा आटा सुबह इस्तेमाल करने से घर में धन का प्रवाह रुकता है, बरकत खत्म हो जाती है। मां अन्नपूर्णा का आशिर्वाद पाने के लिए भोजन की शुद्धता बहुत जरूरी है। बासी आटे से बनी रोटी शुद्ध नहीं होती है।

स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख पर बुरा असर

आयुर्वेद के अनुसार, बासी आटे में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, जिससे पेट की बीमारियां, गैस, एसिडिटी और कमजोरी बढ़ती है। लेकिन इससे भी बड़ा नुकसान मानसिक होता है। घर के सदस्य चिड़चिड़े, झगड़ालू हो जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई में मन नहीं लगता, पति-पत्नी में अनबन बढ़ती है। पितृ दोष भी लग सकता है, क्योंकि बासी भोजन पितरों को अप्रिय है।

शास्त्रों में सख्त मनाही

धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु और स्मृतिग्रंथों में साफ लिखा है कि 'रात्रौ संध्या समये च यत् भुक्तं तत् बासी भवति' अर्थात रात का बचा हुआ आटा बासी माना जाता है। इसे अगले दिन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

सही तरीका यह है:

  • जितना आटा चाहिए, उतना ही गूंथें।
  • बचा आटा हो तो उसे पक्षियों को डाल दें या गाय को खिला दें।
  • हर रात रसोई साफ करके सोएं और सुबह ताजा आटा गूंथकर रोटी बनाएं।

ये छोटी सी आदत अपनाने से घर में मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है। धन की बरकत बढ़ती है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और पारिवारिक सुख बना रहता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।