Rang Panchami 2026 kab hai is din hoti devtaaon ki Holi isse jusi katha bhi janein Rang Panchami 2026: देवताओं की होली होती है होली के पांच दिन बाद, जानें क्या है इससे जुड़ी कथाए, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Rang Panchami 2026: देवताओं की होली होती है होली के पांच दिन बाद, जानें क्या है इससे जुड़ी कथाए

Rang Panchami 2026 kab hai:होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी मनाई जाती है। इसकी शुरुआत होली के अगले दिन से हो जाती है, जो पंचमी तक चलती है।

Wed, 4 March 2026 11:12 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Rang Panchami 2026: देवताओं की होली होती है होली के पांच दिन बाद, जानें क्या है इससे जुड़ी कथाए

होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी मनाई जाती है। इसकी शुरुआत होली के अगले दिन से हो जाती है, जो पंचमी तक चलती है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन सभी देवता अपने भक्तों साथ होली खेलने के लिए पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए रंग पंचमी को देव पंचमी भी कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार रंग पंचमी की परंपरा द्वापर युग में कृष्ण ने शुरू की थी। कृष्ण ने राधा के साथ चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को होली खेली थी। यह देखकर गोपियां भी राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने लगीं। देवी-देवताओं ने जब पृथ्वी पर आनंद की ऐसी अनोखी छटा देखी, तो उनके अंदर भी राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने की इच्छा हुई। अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने गोपियों और ग्वालों का रूप धारण लिया और उनके साथ होली खेलने ब्रज में आ गए, इसलिए रंग पंचमी को देवताओं की होली माना जाता है। द्वापर युग में शुरू हुई यह परंपरा आज भी चल रही है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन राधा-कृष्ण अपना वेश बदलकर भक्तों के साथ होली खेलने पृथ्वी पर आते हैं।

एक मान्यता यह भी है कि कृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाने के बाद रंग खेल कर उत्सव मनाया था। एक अन्य कथा कहती है, फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूतना का वध हुआ था। इस खुशी में नंदगांववासियों ने पांच दिन तक रंग खेलकर उत्सव मनाया था। पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी। एक दिन राजा बलि के यहां वामन पधारे। भगवान वामन की सुंदर और मनमोहक छवि देखकर रत्नमाला के मन में ममत्व जाग उठा। वह मन-ही-मन सोचने लगी कि मेरा भी ऐसा ही पुत्र हो, ताकि उसे हृदय से लगाकर दुलार करती। भगवान ने उसकी मन की इच्छा को जान लिया और तथास्तु कहा।

इसके बाद भगवान ने राजा बलि का अहंकार दूर करने के लिए तीन पग भूमि मांगी, तो रत्नमाला को बहुत क्रोध आया। उसके मन में विचार आया कि अगर ऐसा मेरा पुत्र होता, तो मैं उसे विष दे देती। भगवान ने उसके इस भाव को भी जानकर तथास्तु कह दिया। भगवान के इस वरदान के कारण ही रत्नमाला का अगला जन्म पूतना के रूप में हुआ।

एक अन्य पौराणिक कहानी के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका के मरने और प्रह्लाद के बचने की खुशी में लोगों ने पांच दिन तक रंग खेल कर उत्सव मनाया। भगवान शिव ने फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही रति को कामदेव को जीवित करने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद चारों ओर खुशियां छा गईं और देवताओं ने हर्षोल्लास के साथ रंगोत्सव मनाया, इसलिए इसे देव होली भी कहा जाता है। इस दिन पंचमी तिथि थी।

होलिका दहन के दिन जहां होलिका, प्रह्लाद और नृसिंह भगवान की पूजा की जाती है, वहीं धुलेंडी के दिन विष्णु और लक्ष्मी की पूजा का प्रचलन है। रंग पंचमी के दिन राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। खासतौर पर बरसाने में इस दिन उनके मंदिर में विशेष पूजा होती है। ब्रज क्षेत्र में रंग पंचमी के दिन को पांच दिन तक चलने वाले होली पर्व के समापन का दिन भी माना जाता है।

अश्वनी कुमार

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