premanand maharaj pravachan is it necessary to make a janam kundli क्या जन्म कुंडली बनानी जरूरी होती है? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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क्या जन्म कुंडली बनानी जरूरी होती है? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज

जन्म कुंडली में किसी भी व्यक्ति की जिंदगी का लेखा जोखा होता है। इसके आधार पर कई बड़े निर्णय भी लिए जाते हैं। हाल ही में एक प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने बताया है कि क्या कुंडली बनानी वाकई में जरूरी होती है? 

Sat, 22 Nov 2025 09:45 AMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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क्या जन्म कुंडली बनानी जरूरी होती है? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज

किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली को जन्म की तारीख से लेकर समय और जगह के हिसाब से बनाते हैं। ये एक ऐसा ज्योतिषीय चार्ट होता है, जिसके आधार पर काफी चीजों को समझा जा सकता है। ग्रहों की चाल से होने वाले बड़े प्रभाव का जिक्र कुंडली में होता है। शादी से लेकर करियर समेत कई पहलुयों का हिंट कुंडली से ही लग जाता है। जहां कई लोग शादी-ब्याह के लिए कुंडली मिलान को बेहद ही जरूरी मानते हैं। वहीं कुछ लोग ये कहते हैं कि बस मन मिल जाए फिर तो सब सही है। ऐसे में जानना जरूरी है कि क्या कुंडली बनाना वाकई में जरूरी है? बता दें कि वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने एक प्रवचन के दौरान इस बारे में बात की थी। प्रवचन के दौरान एक महिला ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि क्या जन्म कुंडली बनाना जरूरू है?

इस वजह से कुंडली बनानी है जरूरी

कुंडली बनवाई जाए या नहीं वाली बात पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्याह वगैरह करना है तो जरूरी होता ही है। बाबा जी बनवाना हो तो कोई बात नहीं है। जन्म कुंडली अब लड़का, बच्चा और नाती होते है...जिनके घर में ब्याह होना है तो जन्म कुंडली इत्यादि की जरूरत पड़ती ही है। आजकल समय ऐसा आ रहा है कि कौन कुंडली देखता है? पहले बोलते थे कि कितने गुण मिलते हैं? ये सब अब कहां चल रहा है। लव मैरिज, लिवइन रिलेशन...इनमें कहां जरूरत होती है। वैसे बनवा लेना चाहिए। ये शास्त्रीय पद्धिति और विचार आदि के लिए ये जरूरी होता है।

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कुंडली मिलने के बाद भी लड़ाई क्यों?

एक शख्स ने इसी दौरान प्रेमानंद महाराज से कहा कि कुंडली मिलने के बाद भी बहुत लड़ाइयां होती है। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि लड़ाइयां तब तो बंद होंगी जब सद्विचार होंगे। कुंडली से थोड़े ही हो जाएंगे। आपका सद्विचार होगा तभी तो मंगल विचार होगा। पत्नी जब कटु बोल रही है तो हम थोड़ा कम हो गए। हम दोनों जीवनसाथी है तो बढ़िया मंगलमय जीवन जिएं। अरे वो थोड़ा गुस्सा हो गई तो हम डाउन हो गए। ऐसा होना चाहिए। वो डाउन है तो अपनी बात रख दी। प्यार से चलना चाहिए। लड़ने से कोई हल नहीं मिलता है। प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि अगर पत्नी किसी बात से खुश या संतुष्ट नहीं है तो पति को उसे संतुष्ट जरूर करना चाहिए। ये जरूरी है कि समस्या को समझा जाए। किसी पर हाथ उठाना...ये सब राक्षसी व्यवहार है। ये बिल्कुल भी ठीक नहीं है। एक-दूसरे की कमियों को सहकर आगे बढ़ने से ही सब अच्छा होता है।

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