premanand maharaj explains that when should we be strict Premanand Maharaj: कैसी परिस्थिति में हमारा स्वभाव कठोर होना चाहिए? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज?, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

Premanand Maharaj: कैसी परिस्थिति में हमारा स्वभाव कठोर होना चाहिए? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज?

प्रेमानंद महाराज ने अपने लेटेस्ट एकांतित वार्तालाप में बताया है कि हमें किन परिस्थितियों में कठोर रहना चाहिए? साथ ही उन्होंने बताया है कि स्वार्थी इंसान की सबसे बड़ी पहचान क्या है?

Tue, 13 Jan 2026 09:02 PMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share
Premanand Maharaj: कैसी परिस्थिति में हमारा स्वभाव कठोर होना चाहिए? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज?

वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज अपनी बातों से कई लोगों को सही राह दिखाते हैं। अपने प्रवचन के दौरान वह कई ऐसी बातें कहते हैं जिसका पालन अगर कर लिया जाए तो जिंदगी की आधी से ज्यादा मुश्किलें खत्म हो सकती हैं। अपने एकांतित वार्तालाप के दौरान वह कई लोगों के सवालों का जवाब देते हैं। हाल ही में एक बच्चे ने उनसे एक दिल छू लेने वाला सवाल किया। बच्चे ने पूछा कि हमें कब-कब कठोर होना चाहिए? इस पर प्रेमानंद महाराज ने बड़े ही सरलता से अपनी बात रखी।

अपने लिए बनो कठोर

प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जगह-जगह पर अवसर पर किया जाता है। जिससे हमें लगे कि गलत है तो हम उसे कठोर करते हैं। कठोर हृदय से हम उसे सहते हैं। अब जहां हमारी कोई निंदा कर रहा है तो हम हमारे हृदय को कठोर कर लेते हैं। स्वभाव के कठोरता में सबकी कठोरता आ जाती है। स्वभाव में ही सब कुछ होता है। हृदय, वाणी, देखना और बोलना, उठना और बैठना सब आ जाएगा। जहां किसी को कष्ट हो रहा है, वहां हम द्रवित हो जाते हैं। जहां हमें कष्ट हो रहा है, वहां हम कठोर हो जाते हैं। हमारी कोई निंदा करें, उसे हम सह लेते हैं लेकिन हम किसी की निंदा कभी नहीं कर सकते हैं। हमें कोई दुख दें। हम उसे कठोर भाव से सह लेंगे, लेकिन हम किसी को कठोर भाव से दुख दें, ऐसा कभी भी नहीं हो सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कब समझा जाए कि जीवन सफल हो गया है? जानें क्या बोले प्रेमानंद महाराज
ये भी पढ़ें:आत्मा या फिर शरीर? आखिर किसे मिलता है पाप और पुण्य का फल

ये है स्वार्थी लोगों के लक्षण

प्रेमानंद महराज ने आगे कहा कि अपने लिए कठोर रहो और दूसरों के लिए द्रवित रहो। दूसरों के लिए कठोर और अपने लिए द्रवित ये तो स्वार्थी लोगों का लक्षण है। परमार्तिक लक्षण है कि अपने लिए कठोर रहो। दूसरे को सर्दी लग रही है तो अपनी जैकेट उतार के दे दिया। अपने खुद सर्दी सह लेते हैं लेकिन दूसरे को नहीं नहीं हम उसके ठंड में कांपते हुए नहीं देख सकते हैं। ये है कठोरता। अपने लिए कठोर रहो लेकिन दूसरों के लिए मृदुता। जो दूसरों के लिए कठोर और अपने लिए मृदु रहे तो वो राक्षस है। वो राक्षसी स्वभाव का है। जो दूसरों के लिए तो कठोर व्यवहार करता है और अपने लिए मृदु हो तो वो राक्षसी स्वभाव का होता है। जो इसके उलटा होता है वो देवी संपदा वाला है।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!