Paush Amavasya kab hai date time puja vidhi shubh muhurat snan daan ka samay पौष अमावस्या कब है? नोट कर लें डेट, स्नान-दान का समय और सभी शुभ मुहूर्त, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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पौष अमावस्या कब है? नोट कर लें डेट, स्नान-दान का समय और सभी शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में अमावस्या का दिन बेहद पवित्र माना जाता है और पौष माह में आने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि स्नान, दान और पितरों को याद करने के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है।

Thu, 11 Dec 2025 01:03 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पौष अमावस्या कब है? नोट कर लें डेट, स्नान-दान का समय और सभी शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में अमावस्या का दिन बेहद पवित्र माना जाता है और पौष माह में आने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि स्नान, दान और पितरों को याद करने के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। माना जाता है कि इस दिन किए गए तर्पण और दान से पितर प्रसन्न होते हैं और जीवन से रुकावटें दूर होती हैं। घर-परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है।

पौष अमावस्या 2025 तिथि

पंचांग के अनुसार पौष अमावस्या इस वर्ष 19 दिसंबर 2025, शुक्रवार को है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ- 19 दिसंबर सुबह 4:59 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त- 20 दिसंबर सुबह 7:12 बजे

उदयातिथि के नियम से सभी शुभ कार्य 19 दिसंबर को ही किए जाएंगे।

स्नान-दान का शुभ समय

पौष अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त सबसे शुभ माना गया है:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:19 से 6:14 बजे

इस दौरान स्नान, जप, ध्यान और तर्पण करना अत्यंत फलदायी है।

अगर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, तो सूर्योदय के बाद भी स्नान और दान कर सकते हैं। स्नान के बाद अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।

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अन्य शुभ मुहूर्त

लाभ मुहूर्त: 8:26 से 9:43 बजे

अमृत मुहूर्त: 9:43 से 11:01 बजे

अभिजीत मुहूर्त: 11:58 से 12:39 बजे

राहुकाल (शुभ कार्य वर्जित):

11:01 से 12:18 बजे तक

इस पौष अमावस्या पर खास योग बन रहे हैं: सुबह से 3:47 बजे तक शूल योग उसके बाद गण्ड योग। ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह से रात 10:51 बजे तक, फिर मूल नक्षत्र। दोनों नक्षत्र और योग आध्यात्मिक कार्य, तर्पण और पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इसलिए इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों का फल बढ़ जाता है।

पितरों को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम समय

मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए कर्म स्वीकार करते हैं। इसलिए: सुबह स्नान के बाद तर्पण करना सबसे शुभ है।

श्राद्ध, पिंडदान और पितृ कर्म दोपहर 11:30 से 2:30 बजे के बीच करना श्रेष्ठ माना जाता है।

कहा जाता है कि इस दिन किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है, पितृ दोष कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं। घर में शांति, सौभाग्य और उन्नति बनी रहती है।

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