Papmochani Ekadashi 2026 kab hai ekadashi date and time in india 15 march 2026 why this vrat keep Papmochani Ekadashi 2026 kab hai: पापमोचिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, इस व्रत को क्यों रखा जाता है, क्या है महत्व, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Papmochani Ekadashi 2026 kab hai: पापमोचिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, इस व्रत को क्यों रखा जाता है, क्या है महत्व

Papmochani Ekadashi 2026 date and time in india: चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पापमोचनी एकादशी मनाया जाता है। इस व्रत का नाम ही 'पापमोचनी' है, अर्थात पापों से मुक्ति दिलाने वाली कहा जाता है। 

Tue, 10 March 2026 10:58 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Papmochani Ekadashi 2026 kab hai: पापमोचिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, इस व्रत को क्यों रखा जाता है, क्या है महत्व

चैत्र मास में जहां एक तरफ नवरात्र व्रत आते हैं, उससे पहले पापमोचिनी एकादशी का व्रत भी आता है। यह व्रत बहुत खास माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सभी पापों को शमन हो जाता है। एक तरफ चैत्र मास में मार्च महीने में चैत्र कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पापमोचिनी एकादशी और कामदा एकादशी आ रही हैं। मार्च में दोनों व्रत होगें। अभी चैत्र नवरात्र से पहले कृष्ण पक्ष की पापमोचिनी एकादशी आ रही है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आपको बता दें कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। इसके अलावा पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से उस व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । आइए जानें इस साल पापमोचिनी एकादशी का व्रत कब किया जाएगा।

कब रखा जाएगा पापमोचिनी एकादशी का व्रत

पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 मार्च को सुबह 4:10 से आरंभ होगी जो 15 मार्च सुबह 9:16 पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि और दशमी रहित तिथि 15 मार्च को मिल रही है, इसलिए 15 मार्च को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। दरअसल एकादशी के बारे में कहा जाता है कि दशमी रहित एकादशी का व्रत नहीं रखना चाहिए। द्वादशी सहित एकादशी का व्रत रख सकते हैं। यह व्रत अच्छा माना जाता है , इसलिए 15 मार्च को एकादशी का व्रत रखा जा सकता है। वहीं 16 मार्च को सुबह 6:30 से 8:45 पर बीच पापमोचिनी एकादशी के व्रत का पारण होगा।

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क्यों रखा जाता है पापमोचिनी एकादशी का व्रत

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इस बार पापमोचिनी एकादशी के दिन श्रवण नक्षत्र बन रहा है, इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र भी बन रहा है। वहीं शिवयोग का निर्माण भी इस दिन रहेगा। अगर आप ये व्रत रख रहे हैं , तो सबसे पहले व्रत का संकल्प भगवान विष्णु के सामने लें। इसके बाद भगवान की कथा करें।इसको पढ़ने ओर सुनने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। ब्रह्महत्या, सुवर्णकी चोरी, सुरापान और गुरुपलीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत के करने से पापमुक्त हो जाते हैं। यह व्रत बहुत पुण्यमय है। इस दिन मान्यता है कि इसव्रत से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से जातकों को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल सकती है। इसदिन पवित्र नदियों में स्नान भी करना चाहिए और भगवान के लिए दान भी करना चाहिए। इसके अलावा शाम को पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाएं और तुलसी की पूजा भी जरूर करें।

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