mohini Ekadashi date and time shubh muhurat-puja Vidhi paran time lord vishnu kab hai mohini ekadashi Ekadashi Kab hai: 26 या 27 अप्रैल मोहिनी एकादशी किस दिन, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में इस बार एकादशी, पढ़ें पारण टाइम, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Ekadashi Kab hai: 26 या 27 अप्रैल मोहिनी एकादशी किस दिन, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में इस बार एकादशी, पढ़ें पारण टाइम

इस दिन श्रद्धालु प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इस व्रत में संकल्प लेना बहुत जरूरी है। दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करते हैं। शाम के समय दीप-धूप से पूजा कर एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया जाता है।

Sun, 26 April 2026 08:34 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Ekadashi Kab hai: 26 या 27 अप्रैल मोहिनी एकादशी किस दिन, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में इस बार एकादशी, पढ़ें पारण टाइम

वैशाख के शुक्लपक्ष में मोहिनी नाम से प्रसिद्ध एकादशी आती है। मोहिनी एकादशी को उपवास करने आपके लिए एक नहीं कई लाभ होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा तो मिलती है, साथ ही सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। अनेक जन्मों के किए हुए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। आपको बता दें कि भगवान श्रीहरि ने मोहिनी रुप धर कर देवताओं को अमृतपान कराया था, इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत खास है। यहां हम आपको बताएंगे कि एकादशी व्रत किस दिन रखा जाएगा और इसका पारण कब होगा।

मोहिनी एकादशी कब है 26 अप्रैल या 27 अप्रैल ?

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि रविवार 26 अप्रैल को शाम 06:08 मिनट से शुरु होकर अगले दिन सोमवार 27 अप्रैल को शाम 06:17 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू हो जाएगी। 26 अप्रैल को दशमी युक्त एकादशी है और 27 अप्रैल को द्वादशी युक्त, इसलिए उदया तिथि और द्वादशी के साथ मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। इस बार एकादशी पर आधे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और आधे दिन हस्त नक्षत्र रहेगा। पद्दपुराण में कहा गया है कि दशमी वाली एकादशी आपको आसुरी स्वभाव वाली होती है। इसलिए द्वादशी युक्त रखें, यह वैष्णव गुण वाली होती है अगर किसी एकादशी पर द्वादशी और त्रयोदशी का स्पर्श हो रहा हो, तो वो एकादशी बहुत खास होता है। इसके अलावा ज्येष्ठ मास की एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी कहते हैं, इसे निर्जला एकादशी कहा गया है।

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व्रत और पूजन विधि

पंडित पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस दिन श्रद्धालु प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इस व्रत में संकल्प लेना बहुत जरूरी है। दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करते हैं। शाम के समय दीप-धूप से पूजा कर एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। इसके अलावा रात को भगवान का कीर्तन भी किया जाता है। एकादशी व्रत में यह बहुत खास माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण कर व्रत पूर्ण किया जाता है। व्रत का पारण अगले दिन 28 अप्रैल को सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकेगा।

आध्यात्मिक लाभ

ज्योतिषाचार्य अभिराज कुमार अकेला ने बताया मोहिनी एकादशी का व्रत मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और आर्थिक उन्नति प्रदान करता है। यह व्रत विशेष रूप से मोक्ष की प्राप्ति और जीवन के कष्टों को दूर करने वाला माना गया है।

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