Makar Sankranti and Shattila Ekadashi on 14 January, Khichdi Parv on 15 January मकर संक्रांति पर एकादशी का दुर्लभ योग, पुण्य फल कई गुना बढ़ेगा, 15 जनवरी को मनाएं खिचड़ी पर्व, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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मकर संक्रांति पर एकादशी का दुर्लभ योग, पुण्य फल कई गुना बढ़ेगा, 15 जनवरी को मनाएं खिचड़ी पर्व

इस साल मकर संक्रांति आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। इस साल मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। संक्रांति और एकादशी का एक साथ होना अक्षय पुण्य फलदायक माना जाता है, यानी इस दिन किए गए दान, पूजा और धार्मिक कर्मों का फल लंबे समय तक प्राप्त होता है।

Sun, 11 Jan 2026 11:39 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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मकर संक्रांति पर एकादशी का दुर्लभ योग, पुण्य फल कई गुना बढ़ेगा, 15 जनवरी को मनाएं खिचड़ी पर्व

Makar Sankranti and Shattila Ekadashi on 14 January: इस साल मकर संक्रांति आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। इस साल मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्रांति और एकादशी का एक साथ होना अक्षय पुण्य फलदायक माना जाता है, यानी इस दिन किए गए दान, पूजा और धार्मिक कर्मों का फल लंबे समय तक प्राप्त होता है। इस बार मकर संक्रांति के दिन सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। इन विशेष योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि इस बार मकर संक्रांति को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है और पर्व को इसी दिन मनाना उचित बताया जा रहा है।

पंचांग के मुताबिक 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसी समय से संक्रांति पर्व की शुरुआत मानी जाएगी। इस दिन का महापुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। विद्वानों के अनुसार इस अवधि में किया गया दान और पुण्य कर्म विशेष फल प्रदान करता है।

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मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन स्नान के बाद तिल, गुड़, चावल और वस्त्रों का दान किया जाता है। खिचड़ी खाने और दान देने का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि इस वर्ष षटतिला एकादशी का संयोग होने के कारण विद्वानों ने 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी द्वादशी को खिचड़ी पर्व मनाने की सलाह दी है। विष्णु पुराण में एकादशी के दिन चावल के सेवन को निषिद्ध बताया गया है। व्रती के लिए तो चावल का स्पर्श भी वर्जित माना गया है, जबकि द्वादशी तिथि पर चावल का दान और व्रत पारण अधिक पुण्यकारी माना गया है। इसी कारण 15 जनवरी को खिचड़ी पर्व मनाना बेहतर बताया गया है।

शास्त्रों में मकर संक्रांति को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का प्रतीक माना गया है। दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक कहा गया है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। प्रकाश की वृद्धि और अंधकार में कमी को जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति को केवल पर्व नहीं, बल्कि नए आरंभ और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

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