Mahashivratri Puja Vidhi: महाशिवरात्रि पूजा के लिए जानें शिवजी पर क्यों अर्पित करते है हरि मूंग और सरसो
महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव का दिन । ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इससे पहले मंदिरों में भगवान शिवऔर मां पार्वती के विवाह के सभी कार्य किए जाते हैं।

महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव का दिन । ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इससे पहले मंदिरों में भगवान शिवऔर मां पार्वती के विवाह के सभी कार्य किए जाते हैं। इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त भगवान शिव पर बहुत सी चीजें अर्पित करते हैं। इनमें हर चीज का अपना महत्व है और अलग-अलग मनोकामना पूर्ति के लिए ये चीजें अर्पित की जाती हैं। इनको कैसे अर्पित किया जाता है और इनसे क्या मनोकामना की पूर्ति होती है। ये आपको पता होना चाहिए। महाशिवरात्रि से पहले हम आपको इन्हीं चीजों के बारे में बताएंगे।
भगवान शिव को क्यों अर्पित करते हैं हरी मूंग
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को हरी मूंग अर्पित करनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति भगवान शिव को हरी मूंग अर्पित करते हैं, उन्हें भगवान की कृपा से सुख मिलता है। इसलिए लोग महाशिवरात्रि पर शिवजी को हरी मूंग अर्पित करते हैं। लेकिन आपको इसकी मात्रा भी पता होनी चाहिए कि शिवजी को हरी मूंग कितनी अर्पित करनी चाहिए। शिवमहापुराण में लिखा है कि शिवजी का एक लाख मूंग से पूजन किए जाने पर भगवान् शिव सुख देते हैं। साढ़े सात प्रस्थ और दो पल यानी साढ़े सात सेर तेरह माशा भर मूँग संख्या में एक लाख होती है। इसे भगवान शिव को अर्पित कर 11 ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। अगर शत्रुओं को हराना चाहते हैं, तो भ
क्यों अर्पित किए जाते हैं सरसों के दानें
ऐसा कहा जाता है कि जो भगवान शिव को सरसों के दाने अर्पित करता है भगवा शिव उसके शत्रुओं का विनाश करते हैं। बीस पल यानी ३० माशा भर सरसों के एक लाख दाने हो जाते हैं। इन एक लाख सरसों के दानों से की गई शिवकी पूजा निश्चित ही शत्रु नाश करने वाली होती है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि शिवजी को चावल अर्पित करने से लक्ष्मी जी प्राप्त होती है।
कब है महाशिवरात्रि और पूजा के चार पहर का समय
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम को 5:05 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी की शाम 5:34 बजे तक रहेगी। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा रात्रिकालीन मान्य है, इसलिए महाशिवरात्रि 15 फरवरी की रात्रि को ही मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर रात के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा व अभिषेक का विधान है। पहला प्रहर शाम 6.25 से 9.36 बजे तक, दूसरा प्रहर रात 9.37 से 12.48 बजे तक, तीसरा प्रहर रात 12.49 से सुबह 4 बजे तक और चौथा प्रहर सुबह 4.01 से अगली सुबह 7.12 बजे तक होगा।




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