MahaShivratri date: त्रयोदशी-चतुर्दशी तिथि इस दिन, महाशिवरात्रि पर भद्रा भी, बिल्वपत्र समर्पित होने से ही शिवपूजा सफल
Shivratri kab hai: महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग निर्जला व्रत रखते हैं और भगवान शिव की चार पहर पूजा करते हैं। इस बार शिवरात्रि की तिथि को लेकर कंफ्यूजन हो रहे हैं,

महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग निर्जला व्रत रखते हैं और भगवान शिव की चार पहर पूजा करते हैं। इस बार शिवरात्रि की तिथि को लेकर कंफ्यूजन हो रहे हैं, तो जान लें कि इस साल रविवार को महाशिवरात्रि की तिथि पड़ रही है। 15 फरवरी को शाम को चतुर्दशी तिथि है, इसलिए शाम को यह तिथि होने के कारण शिवरात्रि व्रत 15 फरवरी को किया जाएगा। .निशित काल पूजा 16 फरवरी को रात 12.28 मिनट से 1.17 मिनट तक की जाती सकती है, लेकिन व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा।
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को बिल्व पत्र क्यों अर्पित करते हैं?
शिवमहापुराण में लिखा है कि भगवान शिव की पूजा बिना बिल्व पत्र के नहीं होती है। बिल्वपत्र समर्पित होने से ही शिव को पूजा सफल होती है। भगवान को कितने उत्पाद अर्पित कर दें, लेकिन अगर कुछ भी नहीं है, तो सिर्फ बिल्व पत्र को जरूर रखें, इसके बिना आपकी पूजा सफल नहीं होगी। महाशिवरात्रि पर सुगंधित व्यंजन और उत्तम तेल, रंग आदि विविध वस्तुएं भगवान शिव को अर्पित करें। इसके बाद गुग्गुल और अगुरु आदि से धूप निवेदित करें। अपनी जो भी इच्छा हो, उसके साथ भगवान शिव को कमल, शतपत्र, शंखपुष्प, कुशपुष्प, धतूर, मन्दार, द्रोणपुष्प, तुलसीदल और बिल्वपत्र से भगवान शंकरको विशेष पूजा करें।
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को और क्या-क्या अर्पित करते हैं?
इस दिन भगवान का रुद्राभिषेक कराते हैं।भगवान को रूद्राभिषेक से पहले दूध, दही, घी, मधु, शक्कर से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उनका भव्य शृंगार कर दूध और गंगाजल से रूद्राभिषेक होता है। भगवान शिव को भष्म शृंगार, अष्टगंध शृंगार, महाकाल शृंगार, इत्र शृंगार होता है। पूजन सामग्री में भांग, रोली, धूप, अगरबत्ती, दीप, भष्म, अष्टगंध, काला तिल, जौ, सिंदूर, कपूर, लवंग, इलायची, इत्र, सुपाड़ी, नारियल, अबीर, गुलाल आदि चीजें अर्पित की जाती है।
महाशिवरात्रि पर भद्रा और ग्रहों और नक्षत्रों का संयोग
महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया भी रहेगा। इस दिन भद्रा सायं 05.05 मिनट से रात्रि 05.20 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है, इस दिन चतुर्दशी लगने से त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी का संयोग भी रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग के अलावा इस दिन उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग, व्यतीपात योग पूरे दिन रहेगा। वहीं चार ग्रह एक ही राशि में रहेंगे, चतुग्रही योग भी रहेगा।
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त
पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक
दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट तक
तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक
चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक




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