mahakaleshwar ujjain bhasma aarti not made from cremation ash know truth about ingredients उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्मशान की राख से नहीं, इन चीजों से तैयार भस्म से होती है आरती, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्मशान की राख से नहीं, इन चीजों से तैयार भस्म से होती है आरती

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल को भस्म से शृंगार किया जाता है, जिससे मंदिर का वातावरण रहस्यमय और पवित्र हो जाता है। भक्तों में यह धारणा प्रचलित है कि भस्म श्मशान से लाई जाती है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। आइए जानते हैं इसकी सच्चाई 

Sun, 8 March 2026 10:46 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्मशान की राख से नहीं, इन चीजों से तैयार भस्म से होती है आरती

उज्जैन का श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रसिद्ध है। यहां की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और दिव्य अनुभूति प्रदान करती है। भस्म आरती के दौरान महाकाल को भस्म (विभूति) से शृंगार किया जाता है, जिससे मंदिर का वातावरण रहस्यमय और पवित्र हो जाता है। भक्तों में यह धारणा प्रचलित है कि भस्म श्मशान से लाई जाती है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। मंदिर के पुजारी और अधिकारियों के अनुसार भस्म श्मशान की राख से नहीं, बल्कि शुद्ध और पवित्र सामग्रियों से तैयार की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं भस्म की तैयारी, आरती का समय और महत्व।

भस्म आरती का महत्व और भ्रम

भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की सबसे अनोखी पूजा है, जो शिव के तांडव और काल रूप का प्रतीक है। भस्म लगाने से भक्तों को कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति मिलती है। लोकप्रिय धारणा है कि भस्म श्मशान से आती है, लेकिन मंदिर प्रशासन और पुजारियों के अनुसार ऐसा नहीं है। यह भस्म पूरी तरह शुद्ध विधि से तैयार की जाती है, जिसमें कोई अशुद्धि नहीं होती। यह प्रक्रिया मंदिर परिसर में ही होती है और महानिर्वाणी अखाड़े के साधु इसे संभालते हैं। भस्म का उपयोग शिव को अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

भस्म किससे तैयार होती है?

महाकाल पर चढ़ने वाली पवित्र भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडों (उपलों) और विशेष वृक्षों की लकड़ियों को जलाकर बनाई जाती है। मुख्य सामग्रियां इस प्रकार हैं:

  1. कपिला गाय का गोबर (कंडे) - शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक।
  2. शमी की लकड़ी - औषधीय गुणों वाली।
  3. पीपल की लकड़ी - आध्यात्मिक महत्व वाली।
  4. पलाश की लकड़ी - ऊर्जा प्रदान करने वाली।
  5. बड़ (बरगद) की लकड़ी - दीर्घायु का प्रतीक।
  6. अमलतास की लकड़ी - स्वास्थ्यवर्धक।
  7. बेर की लकड़ी - शक्ति देने वाली।

इन सभी को एक साथ जलाया जाता है, जिसमें जड़ी-बूटियां, कपूर और गुग्गल भी मिलाए जाते हैं ताकि भस्म सुगंधित और शक्तिशाली बने। यह प्रक्रिया आयुर्वेदिक 'पुट पाक' विधि से होती है, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ शुद्धिकरण किया जाता है। भस्म महीन छलनी से छानी जाती है और आरती के लिए तैयार की जाती है।

भस्म आरती कितनी देर चलती है और कैसे होती है?

भस्म आरती लगभग 2 घंटे तक चलती है। यह सुबह 4:00 बजे शुरू होती है और ब्रह्म मुहूर्त में पूरी होती है। आरती के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है, घंटियां बजती हैं और महाकाल का विशेष शृंगार किया जाता है। भस्म को विधि-पूर्वक महाकाल पर लगाया जाता है, जो भक्तों को दूर से दर्शन का अवसर देता है। यह आरती केवल महाकालेश्वर मंदिर में ही होती है और अन्य ज्योतिर्लिंगों में नहीं। महिलाओं को इस समय दर्शन से रोका जाता है, जिससे भस्म आरती की पवित्रता बनी रहती है। भक्तों को बुकिंग करानी पड़ती है, क्योंकि भीड़ बहुत अधिक होती है।

महाकाल मंदिर में दिन भर की 6 आरतियां और उनके समय

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के अलावा दिन भर कुल 6 आरतियां होती हैं, जो भक्तों के लिए महत्वपूर्ण हैं:

  • भस्म आरती – सुबह 4:00 बजे (सबसे प्रमुख)
  • बालभोग आरती – सुबह 7:30 बजे (बाल रूप को भोग लगता है)
  • भोग आरती – सुबह 10:30 बजे (दिन का मुख्य भोग)
  • संध्या पूजा – शाम 5:00 बजे (संध्या समय की पूजा)
  • संध्या आरती – शाम 6:30 बजे (संध्या आरती)
  • शयन आरती – रात 10:30 बजे (शयन के समय आरती)

ये आरतियां मंदिर की परंपरा का हिस्सा हैं और भक्त इनमें शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

भस्म आरती के दर्शन का महत्व

भस्म आरती के दर्शन से भक्तों को शिव की कृपा प्राप्त होती है, कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह आरती शिव के भस्म रूप का प्रतीक है, जो संसार की नश्वरता और शाश्वतता का संदेश देती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:रंग पंचमी पर लड्डू गोपाल की ऐसे करें पूजा, इन चीजों का भोग लगा करें प्रसन्न
ये भी पढ़ें:Sunday Remedies: रविवार को जरूर करें ये काम, सूर्य देव की कृपा से चमकेगा आपका भा
ये भी पढ़ें:दांपत्य जीवन में प्यार और मिठास बनाए रखने के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

उज्जैन आने वाले भक्तों को सलाह है कि भस्म आरती के लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग कराएं, क्योंकि सीमित संख्या में प्रवेश होता है। मंदिर परिसर में शुद्धता बनाए रखें और नियमों का पालन करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!