khatu shyam nishan why devotees carry flag know importance and offering rules Khatu Shyam Nishan: खाटू धाम में भक्त निशान लेकर क्यों जाते हैं? जानिए इसका महत्व और नियम, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Khatu Shyam Nishan: खाटू धाम में भक्त निशान लेकर क्यों जाते हैं? जानिए इसका महत्व और नियम

खाटू श्याम के दर्शन के लिए जाने वाले अधिकांश भक्त अपने साथ केसरिया, नारंगी या लाल रंग का निशान (ध्वज) लेकर जाते हैं और इसे बाबा श्याम के चरणों में अर्पित करते हैं। निशान चढ़ाने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

Sat, 7 March 2026 09:38 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Khatu Shyam Nishan: खाटू धाम में भक्त निशान लेकर क्यों जाते हैं? जानिए इसका महत्व और नियम

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यहां बाबा खाटू श्याम की पूजा होती है, जो महाभारत काल में पांडव भीम के पोते और घटोत्कच्छ के पुत्र बर्बरीक थे। लाखों श्रद्धालु रोजाना बाबा के दर्शन के लिए आते हैं और अधिकतर भक्त अपने साथ निशान (ध्वज या झंडा) लेकर जाते हैं। यह निशान यात्रा और अर्पण की परंपरा सदियों पुरानी है, जो बाबा के बलिदान और विजय का प्रतीक है। आइए जानते हैं निशान अर्पित करने की वजह, महत्व और नियम।

निशान अर्पित करने की वजह और परंपरा

हिंदू धर्म में ध्वज को विजय और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। खाटू श्याम जी को निशान चढ़ाने की परंपरा महाभारत काल से जुड़ी है। बर्बरीक ने धर्म की जीत के लिए अपना शीश दान किया था और युद्ध का श्रेय भगवान श्रीकृष्ण को दिया। यह बलिदान और त्याग का प्रतीक है। भक्त निशान लेकर बाबा के प्रति अपनी समर्पण भावना व्यक्त करते हैं। कई भक्त मनोकामना मांगते हैं और पूरी होने पर निशान चढ़ाते हैं, जबकि कुछ पहले से ही अर्पित करते हैं। यह परंपरा प्राचीन है और आज भी जारी है।

बाबा खाटू श्याम कौन हैं?

बाबा खाटू श्याम मूल रूप से बर्बरीक थे, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच्छ के पुत्र थे। उनके पास तीन दिव्य बाण थे, जिनसे वे युद्ध का रुख बदल सकते थे। उन्होंने वचन लिया था कि हारे हुए पक्ष का साथ देंगे। महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण रूप में उनका शीश दान मांगा ताकि धर्म की विजय सुनिश्चित हो। बर्बरीक ने प्रसन्नतापूर्वक शीश दान किया। श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके नाम से पूजे जाएंगे। उनका शीश खाटू में स्थापित हुआ, जहां आज मंदिर है।

निशान की विशेषताएं

खाटू श्याम का निशान आमतौर पर केसरिया, नारंगी, लाल या नीला रंग का त्रिकोणीय ध्वज होता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और बाबा श्याम की फोटो, पवित्र मंत्र, मोर पंख, नारियल की आकृति और कभी-कभी सोने-चांदी की सजावट होती है। यह ध्वज बाबा के बलिदान, पराक्रम और विजय का प्रतीक है। भक्त इसे पैदल यात्रा (जैसे रींगस से खाटू तक 17-18 किमी) में लेकर चलते हैं। नंगे पैर चलना सबसे शुभ माना जाता है।

निशान अर्पित करने का धार्मिक महत्व

निशान चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह बाबा के त्याग और हारे का सहारा बनने की याद दिलाता है। भक्त मानते हैं कि निशान अर्पण से बाबा की विशेष कृपा मिलती है, बिगड़े काम बनते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। कई भक्त मनोकामना पूरी होने पर आभार में निशान चढ़ाते हैं। यह आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जो भक्तों को बाबा के निकट लाता है।

निशान अर्पित करने के नियम और सावधानियां

  1. निशान यात्रा शुरू करने से पहले रींगस में श्याम मंदिर के दर्शन करें, वहां पूजा-अर्चना करें।
  2. नंगे पैर चलें, भजन-कीर्तन करें और बाबा का नाम जपते रहें।
  3. निशान को मंदिर पहुंचाकर बाबा के चरणों में समर्पित करें और कृपा की प्रार्थना करें।
  4. निशान को कभी अपवित्र ना करें, साफ-सुथरा रखें।
  5. अर्पण के बाद कुछ भक्त इसे घर की छत पर लगाते हैं ताकि बाबा की उपस्थिति बनी रहे।

नियमों का पालन करने से फल अधिक मिलता है।

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खाटू श्याम का निशान केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि आस्था, बलिदान और विजय की जीती-जागती निशानी है। मान्यता है कि बाबा श्याम की कृपा से सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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