Kainchi Dham Mela 2026: 15 जून को लगेगा बाबा नीम करौली महाराज के कैंची धाम का मेला, जाने से पहले पढ़ लें ये जरूरी बातें
नैनीताल जिले के प्रसिद्ध कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन के लिए उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी भक्त कैंची धाम आते हैं।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस मेला लगेगा। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बाबा नीम करौली महाराज के भक्त देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी यहां आते हैं। मेले को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
कैंची धाम की स्थापना बाबा नीम करौली महाराज ने 15 जून 1964 को की थी। तभी से हर साल इस दिन यहां स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर विशेष पूजा, भंडारा और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है। बाबा के भक्तों के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं माना जाता।
कौन थे बाबा नीम करौली महाराज?
बाबा नीम करौली महाराज देश के प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। बाद में लोग उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जानने लगे।
बाबा सादगी भरा जीवन जीने के लिए जाने जाते थे। वह अक्सर एक कंबल ओढ़े रहते थे। कहा जाता है कि अगर कोई उनके पैर छूने की कोशिश करता था तो वह उसे हनुमान जी के चरणों में प्रणाम करने के लिए कहते थे। उनके भक्त उन्हें हनुमान जी का परम भक्त मानते हैं।
बाबा से जुड़े कई प्रसंग आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं। उनके भक्त मानते हैं कि बाबा ने अपने जीवन में कई लोगों की मदद की और उन्हें सही रास्ता दिखाया। 11 सितंबर 1973 को बाबा ने वृंदावन में समाधि ली थी।
दुनिया भर में मशहूर है कैंची धाम
आज कैंची धाम सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि दुनिया भर में जाना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के कैंची धाम आने की चर्चा भी अक्सर होती है।
बाबा के जीवन और उनसे जुड़े अनुभवों पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं। ‘मिरेकल ऑफ लव’ जैसी किताबों में भी बाबा के बारे में विस्तार से बताया गया है।
14 और 15 जून को नहीं जा सकेंगे निजी वाहन
मेले के दौरान भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 14 और 15 जून को कैंची धाम क्षेत्र को जीरो जोन घोषित किया है। इन दो दिनों में श्रद्धालु अपने निजी वाहन से सीधे मंदिर तक नहीं पहुंच सकेंगे।
सिर्फ जरूरी सेवाओं और विशेष अनुमति वाले वाहनों को ही आगे जाने दिया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से सहयोग करने की अपील की है।
शटल बस से पहुंचेंगे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग स्थानों से शटल बस सेवा चलाई जाएगी।
- हल्द्वानी और काठगोदाम से किराया 150 रुपये रहेगा।
- नैनीताल और भीमताल से 100 रुपये किराया तय किया गया है।
- भवाली और खैरना से आने वाले श्रद्धालुओं को 50 रुपये देने होंगे।
श्रद्धालुओं को अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े करने होंगे। वहां से शटल बसों के जरिए मंदिर तक पहुंचाया जाएगा।
इस बार तैयार किया गया खास ट्रैकिंग रूट
भीड़ को संभालने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार जंगल के रास्ते एक विशेष ट्रैकिंग रूट भी तैयार किया गया है। इस रास्ते से लोग पैदल चलते हुए कैंची धाम पहुंच सकेंगे।
प्रकृति के बीच बना यह रास्ता श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव भी होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे मुख्य मार्ग पर दबाव कम होगा।
मालपुआ प्रसाद और भंडारा रहेगा आकर्षण का केंद्र
स्थापना दिवस पर बाबा को मालपुए का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, मालपुआ बनाने के लिए विशेष कारीगर बुलाए गए हैं।
हर साल की तरह इस बार भी विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
सुरक्षा के लिए रहेंगे कड़े इंतजाम
मेले के दौरान सुरक्षा के लिए 1500 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी, एसडीआरएफ और अन्य विभागों की टीमें तैनात रहेंगी। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी रखी जाएगी।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे तय नियमों का पालन करें, शटल सेवा का इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।
15 जून को लगने वाला कैंची धाम का स्थापना दिवस मेला बाबा नीम करौली महाराज के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। हर साल यहां आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है।




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