Adhik Maas: इस साल ज्येष्ठ में लग रहा है अधिकमास, इसमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं
Jyeshtha Adhik Maas:नवसंवत्सर में इस बार करीब दो माह के ज्येष्ठ मास का संयोग तीन वर्षों के बाद आया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। आइए जानें इस महीने में क्या करना चाहिए और क्या नहीं

हिन्दू नववर्ष 2083 रौद्र नामक नवसंवत्सर 19 मार्च से शुरू होगा। इस नवसंवत्सर में ज्येष्ठ माह में अधिकमास आएगा। जो 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। ज्योतिष एवं अध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि शुद्ध ज्येष्ठ का आरंभ ज्येष्ठ कृष्णपक्ष दो मई को होगा, जो 16 मई तक रहेगा। उसके बाद ज्येष्ठ अधिकमास होगा। नवसंवत्सर में इस बार करीब दो माह के ज्येष्ठ मास का संयोग तीन वर्षों के बाद आया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।
अधिकमास में क्या करना चाहिए
अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसलिए भगवान की भक्ति करनी चाहिए। पुराणों के मुताबिक इस अधिकमास में यज्ञ-हवन श्रीमद् देवी भागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण सुनना फलदायी माना गया है। इस महीने में दीपदान, मालपुए और पान का दान करना चाहिए।
क्या काम नहीं होते हैं
मांगलिक कामों जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश नहीं जैसे शुभ कार्यों की इस अधिकमास में मनाही होती है। जो काम पहले से चल रहे हैं, वो शुभ कार्य इस महीने में पूरे किए जा सकेत हैं, लेकिन नए काम की शुरुआत इस महीने में नहीं करते हैं। इस महीने में नईचीज खरीद सकते हैं और अन्नप्राशन संस्कार किए जा सकते हैं।
फरवरी मार्च में कौन से बड़े त्योहार
इस साल एक फरवरी को रविदास जयंती, तीन फरवरी को शब-ए-बारात, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि, 27 को रंगभरी एकादशी, 28 को मसाने की होली, दो मार्च को होलिका दहन तथा चार मार्च को होली मनेगी। वहीं 19 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू होगा, 27 मार्च को रामनवमी तथा 31 मार्च को महावीर जयंती पड़ रही है।
ज्येष्ठ मास में हनुमान जी की करें अराधना
पूर्वांचली ने बताया कि यह मास हनुमानजी की आराधना का माना जाता है। जिसे बुढ़वा मंगल कहा जाता है। ऐसे में इस वर्ष नवसंवत्सर में सामान्य माह से ज्यादा मंगलवार मिलेगा। अधिकमास की वजह से कुल आठ मंगलवार प्राप्त हो रहे हैं।




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