How to do puja on vat savitri vrat 16 May 2026 know all about vat Savitri puja vidhi Vat Savitri 2026: कल है वट सावित्री व्रत, कैसे की जाती है पूजा, पढ़ें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Vat Savitri 2026: कल है वट सावित्री व्रत, कैसे की जाती है पूजा, पढ़ें

Vat Savitri puja vidhi: अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिनें वट सावित्री व्रत करती हैं। यह ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तिथि तक चलता है। कई जगह पूर्णिमा पर भी यह व्रत किया जाता है, यहां पढ़ें इसकी संपूर्ण पूजा विधि

Fri, 15 May 2026 03:27 PMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Vat Savitri 2026: कल है वट सावित्री व्रत, कैसे की जाती है पूजा, पढ़ें

अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिनें वट सावित्री व्रत करती हैं। यह ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तिथि तक चलता है। कई जगह पूर्णिमा पर भी यह व्रत किया जाता है।पूजन सामग्री में सावित्री सत्यवान की मूर्तियां, धूप, दीप, घी, बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग का सामान, कच्चा सूत, बरगद का फल, जल भरने के लिए कलश और थाल में सजाने को अन्य सामग्री की इस व्रत में जरूरत होती है। इस साल यह व्रत कब है और कैसे इस व्रत में पूजा करनी चाहिए., इस आर्टिकल में आप इसे ही पढ़ेंगे।

वट सावित्री व्रत कैसे करें, पुराणों में क्या लिखी है विधि

इस व्रत की विधि जो पुराणें में बताई गई है, उसके अनुसार कहा जाता है कि यह व्रत सौभाग्य की इच्छारखने वाली स्त्री को पवित्र होकर तीन दिन के लिए सावित्री-व्रत का नियम ग्रहण करना चाहिए । अगर तीन दिन उपवास रहने की शक्ति न हो तो त्रयोदशी को, चतुर्दशी को अयाचित-व्रत और अमावस्या को उपवास करें। इस दिन सौभाग्य की कामना वाली नारी नदी, आदि में नित्य-स्नान करें ओर सरसों का उबटन लगाकर स्नान करें। इसके बाद जैसी आपकी श्रद्धा हो वैसे मिद्धी, सोने या चांदी की ब्रह्मा सहित सावित्री को प्रतिमा बनाकर बांस के एक पात्र में स्थापित करें और दो नैवेद्य से पूजन करें। कूष्माण्ड, नारियल, ककढुी, तुरई, खजूर, कथ, अनार, जामुन, जम्बीर, नारंगी, अखरोट, कटहल, गुड, लवण, जीरा, अंकुरित अन्न, सप्तधान्य तथा गलेका डोरा (सावित्रीसूत्र) आदि सब पदार्थ बांस के पात्रमें रखकर सावित्रीदेवी को अर्पण कर दें। रात्रि के समय जागरण करें। गीत, वाद्य, नृत्य आदि का उत्सव करें। ब्राह्मण सावित्रीको कथा कहें । इस प्रकार सारी रात्रि उत्सवपूर्वक व्यतीतकर प्रातः व्रती नारी सब सामग्रीसहित सावित्री की प्रतिमा श्रेष्ठ विद्वान्‌ ब्राह्मण को दान कर दें। यथाशक्ति ब्राह्यण-भोजन कराकर स्वयं भी भोजन करें। इस प्रकार ज्येष्ठ मासकी अमावास्याको वटवृक्ष के नीचे काष्ठभार सहित सत्यवान्‌ ओर महासती सावित्री को प्रतिमा स्थापित कर उनका विधिवत्‌ पूजन करना चाहिए। रात्रि को जागरण आदि कर प्रातः वह प्रतिमा ब्राह्मण को दान कर दें। इस विधान से जो स्त्रियां यह सावित्री-व्रत करती हैं, वे पुत्र-पौत्र-धन आदि पदार्थो को पाती हैं और चिरकालतक पृथ्वीपर सब सुख भोगकर पति के साथ ब्रह्मलोकको प्राप्त करती है। यह व्रत स्त्रियों के लिए पुण्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक ओौर धन प्रदान करनेवाला है।

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किस दिन है वट सावित्री व्रत

इस साल 14 मई को चतुर्दशी पर इसका प्रथम और 15 मई को दूसरा संयम होगा। कई जगह तीन दिन तक व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। वैसे मुख्य व्रत 16 मई को अमावस्या पर रखा जाएगा। जहां तक अमावस्या तिथि की बात है तो यह तिथि 16 मई को भोर में पांच बजकर 12 मिनट पर लगेगी। यह 16 मई को मध्यरात्रि के बाद रात एक बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसी दिन वट सावित्री का मुख्य व्रत रखा जाएगा। अखंड सौभाग्य के लिए तीनों देवों की आराधना का विशेष महात्म्य है। वट सावित्री व्रत लगातार तीन दिन तक व्रत न रखने की स्थिति में पहले दिन रात में भोजन, दूसरे दिन अयाचित भोजन तथा अंतिम दिन अमावस्या तिथि पर पूर्ण उपवास रखकर व्रत की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

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