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होलिका दहन कैसे करें, नोट करें संपूर्ण विधि, उपाय, कथा व मंत्र

HOLIKA DAHAN KAISE HOGI HOLIKA DAHAN 2026: होलिका दहन को लेकर लोगों में संशय है, क्योंकि होलिका दहन के दूसरे दिन 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इससे होलिका दहन और होली की तिथि का गणित बिगड़ गया है।

Sun, 1 March 2026 10:15 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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होलिका दहन कैसे करें, नोट करें संपूर्ण विधि, उपाय, कथा व मंत्र

HOLIKA DAHAN KAISE HOGI HOLIKA DAHAN 2026, होलिका दहन विधि: इस बार होलिका दहन को लेकर लोगों में संशय है, क्योंकि होलिका दहन के दूसरे दिन 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इससे होलिका दहन और होली की तिथि का गणित बिगड़ गया है। इस बार 2 मार्च को होलिका दहन, जबकि 4 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। हर साल पूर्णिमा तिथि के प्रदोष काल में भद्रा रहित मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन की विधि हमेशा शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं होलिका दहन की विधि, पूजा की समग्री, मंत्र और उपाय-

होलिका दहन कैसे करें, नोट करें संपूर्ण विधि, उपाय, कथा व मंत्र

होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटें। रोली, चावल से तिलक कर घर पर बने मिष्ठान और देसी घी की अठावरी का भोग लगाकर जल अर्पित कर होलिका और भक्त प्रहलाद की जय का उद्घोष करें। पूजन के बाद हाथ में शुद्ध जल का लोटा लेकर परिक्रमा कर अर्घ्य दें। होलिका में आहुति के लिए कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य एवं नई फसल का कुछ भाग प्रयोग करें।

होलिका पूजन के मंत्र

होलिका मंत्र- ओम होलिकायै नम:

भगवान नरसिंह के लिए मंत्र- ओम नृसिंहाय नम:

भक्त प्रह्लाद मंत्र- ओम प्रह्लादाय नम:

होलिका दहन की पूजा सामग्री

अक्षत, गंध, गुड़, फूल, माला, रोली, गुलाल, कच्चा सूत, हल्दी, एक लोटे में जल, नारियल, बताशा, गेहूं की बालियां और मूंग आदि।

होलिका दहन की कथा-कहानी

हिंदू पुराणों के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप (राक्षसों के राजा) ने देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की पूजा करता है, तो वह वास्तव में क्रोधित हो गया। उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का आदेश दिया। ऐसा इसलिए है क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे आग में नहीं जलाया जा सकता। हालांकि, योजना के अनुसार चीजें नहीं हुईं। होलिका आग में जलकर राख हो गई और विष्णु भक्त प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन (होलिका मानकर होलिका दहन) करने का विधान है। होली का त्योहार यह संदेश देता है कि इसी तरह भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए उपलब्ध रहते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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