Holi 2026 Date and Time: Holika Dahan Muhurat and Impact of Chandra Grahan on the Festival होलिका दहन और रंगों वाली होली के बीच 'चंद्र ग्रहण' का साया, नोट करें सही समय और मुहूर्त, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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होलिका दहन और रंगों वाली होली के बीच 'चंद्र ग्रहण' का साया, नोट करें सही समय और मुहूर्त

इस बार होली पर तिथियों और खगोलीय घटना के कारण खास रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन होगा, 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा और 4 मार्च 2026 (बुधवार) को रंगों वाली होली (धुलेंडी) मनाई जाएगी।

Sat, 28 Feb 2026 10:46 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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होलिका दहन और रंगों वाली होली के बीच 'चंद्र ग्रहण' का साया, नोट करें सही समय और मुहूर्त

Holi 2026 : इस बार होली का पर्व चंद्र ग्रहण लगने की वजह से खास रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन होगा, 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा और 4 मार्च 2026 (बुधवार) को रंगों वाली होली (धुलेंडी) मनाई जाएगी। वाराणसी के प्रचलित हृषीकेश पंचांग और ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, इस वर्ष भद्रा और सूतक के कारण मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

1) 2 मार्च: होलिका दहन-भद्रा के बीच ‘पुच्छ काल’ में श्रेष्ठ समय

शास्त्रों में होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा रहित समय में करने का विधान है।

तिथि: 2 मार्च को सायं 5:18 बजे चतुर्दशी समाप्त होकर पूर्णिमा तिथि शुरू होगी।

भद्रा का समय: पूर्णिमा लगते ही भद्रा प्रारंभ हो जाएगी और 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगी।

क्यों जरूरी है पुच्छ काल?- जब पूरी रात भद्रा हो, तब शास्त्र ‘भद्रा पुच्छ’ (भद्रा का अंतिम भाग) में दहन की अनुमति देते हैं। पुच्छ भाग को दोषमुक्त और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है।

होलिका दहन का सटीक मुहूर्त: रात 12:50 बजे से 2:02 बजे (3 मार्च की सुबह) — कुल 1 घंटा 12 मिनट।

यही समय परंपरा के अनुसार सबसे उत्तम माना गया है। दिन में या भद्रा के मुख काल में दहन से बचने की सलाह दी जाती है।

2) 3 मार्च: पूर्ण (खग्रास) चंद्र ग्रहण-सूतक और परंपरागत सावधानियां

3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि में होगा।

ग्रहण प्रारंभ (भारतीय समय): शाम 6:17 बजे

दृश्यता: भारत के अधिकांश हिस्सों सहित पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के क्षेत्रों में दिखाई देने की संभावना।

सूतक काल: परंपरागत मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक लगभग 9 घंटे पहले से माना जाता है। अतः 3 मार्च की सुबह से ही कई मंदिरों में कपाट बंद रखने और शुभ कार्य टालने की परंपरा रहती है। सूतक काल इसी दिन सुबह लगभग 6:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक माना जाएगा, यानी सुबह से ग्रहण खत्म होने तक यह अवधि “अशुभ” समझी जाएगी और इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य आदि टालने की परंपरागत सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण की मुख्य अवधि दोपहर लगभग 3:20 बजे से शुरू होकर शाम तक जारी रहेगी और भारत में चंद्रमा के उदय के समय ग्रहण का दृश्य भी दिखाई देगा।

धार्मिक आस्था में ग्रहण के दौरान मंत्र-जाप, ध्यान और मानसिक पूजा को श्रेष्ठ माना गया है। चूंकि 3 मार्च ग्रहण के प्रभाव में रहेगा, इसलिए रंगों का उत्सव इस दिन नहीं मनाया जाएगा।

वैज्ञानिक दृष्टि: चंद्र ग्रहण पृथ्वी की छाया के चंद्रमा पर पड़ने से होता है। इसे भय के बजाय एक खगोलीय घटना के रूप में भी समझा जाता है; आस्था के साथ वैज्ञानिक जानकारी का संतुलन बनाए रखना उचित है।

3) 4 मार्च: रंगों वाली होली (धुलेंडी)—चैत्र कृष्ण प्रतिपदा

रंगभरी होली हमेशा चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा को मनाई जाती है।

तिथि स्थिति: 4 मार्च (बुधवार) को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी।

उत्सव का दिन: ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद 4 मार्च को पूरे देश में अबीर-गुलाल के साथ होली खेली जाएगी।

यही कारण है कि 2026 में होली 3 मार्च को नहीं, बल्कि 4 मार्च को मनाई जाएगी।

राशियों पर संभावित प्रभाव

सिंह राशि में ग्रहण होने से कुछ राशियों पर प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा माना गया है:

शुभ संकेत (वृषभ, मिथुन, तुला, मकर):

करियर में उन्नति और धन लाभ के अवसर।

अटके कार्यों में गति और सकारात्मक परिणाम।

सावधानी (मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक):

सिंह: स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान; थकान/ऊर्जा में कमी संभव।

मेष/कर्क: अनावश्यक विवाद और खर्च से बचें।

वृश्चिक: मानसिक तनाव से दूरी और संतुलित दिनचर्या रखें।

मध्यम फल (धनु, कुंभ, मीन):

पारिवारिक विषयों में धैर्य और संवाद बनाए रखना लाभकारी।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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