गणेश चतुर्थी पर 2 घंटे 34 मिनट्स का उत्तम मुहूर्त, जानें सुबह से शाम तक गणेश स्थापना के शुभ मुहूर्त
Ganesh Chaturthi Time, Muhurat: गणेश चतुर्थी पर बड़े ही प्रेम और उमंग के साथ लोग अपने घर में बप्पा की नई मूर्ति लाकर स्थापित करते हैं। इस दिन शुभ मुहूर्त में बप्पा का आगमन कर विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है।

Ganesh Chaturthi Time: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन गणेश चतुर्थी का पर्व बेहद उल्लास के साथ मनाया जाता जाता है। इस साल चतुर्थी तिथि अगस्त 26 को 01:54 पी एम पर प्रारम्भ होगी, जिसका समापन अगस्त 27 को 03:44 बजे तक होगा। चतुर्थी तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव का पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है। बड़े ही प्रेम और उमंग के साथ लोग अपने घर में बप्पा की नई मूर्ति लाकर स्थापित करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल (दोपहर) के समय हुआ था। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना के लिए मध्याह्न मुहूर्त उत्तम माना जाता है। अगर आप किसी कारणवश मध्याह्न काल में पूजन नहीं कर पाते तो सुबह से लेकर शाम के शुभ मुहूर्त में गणेश पूजा कर सकते हैं। आइए जानते हैं गणपति पूजा का मुहूर्त और विधि-
गणेश चतुर्थी पर 2 घंटे 34 मिनट्स का उत्तम मुहूर्त
मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त: 11:05 ए एम से 01:40 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 34 मिनट्स
जानें सुबह से शाम तक मूर्ति स्थापना के शुभ मुहूर्त
- लाभ मुहूर्त- (उन्नति) 05:57 ए एम से 07:33 ए एम
- अमृत मुहूर्त- (सर्वोत्तम) 07:33 ए एम से 09:09 ए एम
- शुभ मुहूर्त- (उत्तम) 10:46 ए एम से 12:22 पी एम
- चर मुहूर्त- (सामान्य) 03:35 पी एम से 05:12 पी एम
- लाभ मुहूर्त- (उन्नति) 05:12 पी एम से 06:48 पी एम
- शुभ मुहूर्त- (उत्तम) 08:12 पी एम से 09:35 पी एम
- अमृत मुहूर्त- (सर्वोत्तम) 09:35 पी एम से 10:59 पी एम
- चर मुहूर्त- (सामान्य) 10:59 पी एम से 12:23 ए एम, अगस्त 28
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:28 ए एम से 05:12 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:31 पी एम से 03:22 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:48 पी एम से 07:10 पी एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:57 ए एम से 06:04 ए एम
- रवि योग- 05:57 ए एम से 06:04 ए एम
गणेश स्थापना की आसान विधि
सबसे पहले घर, मंदिर साफ करें गंगाजल से शुद्धि करें। पूजन सामग्री सहित पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं। अपने घर के उत्तर भाग या पूर्वोत्तर भाग में भी गणेश जी की प्रतिमा या मूर्ति रख सकते हैं और दक्षिण पूर्व में दीपक जलाएं। गणेश जी की मूर्ति को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्वार के ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। गणेश भगवान की प्रतिमा की पूर्व दिशा में कलश रखें। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि को भी स्थापित करें और साथ में एक-एक सुपारी रखें। अपने ऊपर जल छिड़कते हुए ऊँ पुण्डरीकाक्षाय नमः मंत्र का जाप करें। भगवान गणेश को प्रणाम करें। तीन बार आचमन करें तथा माथे पर तिलक लगाएं। मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल चढ़ाएं। पूजन आरंभ करें तथा अंत में गणेश जी की आरती करें और मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगे।
मंत्र: ऊँ पुण्डरीकाक्षाय नमः, ॐ गणेशाय नमः
भोग: मोदक, मोतीचूर के लड्डू, सात्विक खीर, सूखे मेवे, फल, हलवा पूरी, पंचामृत, मिठाई, बेसन या ड्राई फ्रूइट्स के लड्डू आदि।




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