माथा, गला, छाती... जानिए तिलक लगाते वक्त कौन से मंत्र पढ़ने चाहिए?
मंत्रों का उपयोग हिंदू धर्म में आध्यात्मिक और अनुष्ठान अभ्यास में किया जाता है। मंत्रों का प्रयोग अलग-अलग कार्यों के लिए किया जाता है। तिलक लगाते वक्त भी मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। माथा, गला समेत शरीर के कई हिस्सों में तिलक लगाया जाता है।

सनातन धर्म में मंत्र का काफी ज्यादा महत्व होता है। कहा जाता है कि मंत्रों के उच्चारण में बहुत अधिक सकारात्मक ऊर्जा होती है, जिसके जाप से कई तरह की परेशानियां खत्म हो जाती है। मंत्रों का उपयोग हिंदू धर्म में आध्यात्मिक और अनुष्ठान अभ्यास में किया जाता है। मंत्रों का प्रयोग अलग-अलग कार्यों के लिए किया जाता है। तिलक लगाते वक्त भी मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
माथा, गला समेत शरीर के कई हिस्सों में तिलक लगाया जाता है। ऐसे में हर अंग पर तिलक लगाते वक्त अलग-अलग मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। चलिए जानते हैं कि शरीर के अलग-अलग अंगों पर तिलक लगाते वक्त कौन से मंत्र पढ़ने चाहिए।
तिलक लगाने का मंत्र-
किसी भी पूजा में माथे पर तिलक लगाने के लिए एक विशेष मंत्र का प्रयोग किया जाता है, जो इस प्रकार है -
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः, स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः, स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
माथे पर - ॐ श्री केशवाय नमः
गले पर - ॐ श्री गोविंदाय नमः
छाती पर - ॐ श्री माधवाय नमः
पेट पर - ॐ श्री नारायणाय नमः
दाहिनी कमर पर - ॐ श्री विष्णवे नमः
दाहिनी भुजा पर - ॐ श्री मधुसूदनाय नमः
दाहिने कंधे पर - ॐ श्री त्रिविक्रमाय नमः
बायीं कमर पर - ॐ श्री वामनाय नमः
बायीं भुजा पर - ॐ श्री श्रीधर नमः
बाएं कंधे पर - ॐ श्री ऋषिकेशाय नमः
गर्दन के पिछले भाग पर - ॐ श्री पद्मनाभाय नमः
पीठ पर - ॐ श्री दामोदराय नमः
शिखा पर - ॐ श्री वासुदेवाय नमः
तिलक लगाने के नियम
यदि आप भगवान को तिलक लगा रहे हैं, तो आप भगवान को हमेशा अनामिका यानी रिंग फिंगर से तिलक लगाना चाहिए। भगवान, गुरु या किसी अन्य व्यक्ति की मंगल कामना के लिए तिलक लगाने के लिए इस उंगली का उपयोग करना चाहिए। इस उंगली का संबंध सूर्य से माना जाता है और इससे तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है।
स्वयं को तिलक
वहीं, स्वयं को हमेशा मध्यमा उंगली से तिलक लगाना चाहिए। मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से बताया गया है और शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन पूजा करने के बाद भगवान को अनामिका से तिलक लगाने के बाद स्वयं को मध्यमा उंगली से तिलक लगाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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