आज छोटी दिवाली को कितने और किस दिशा में जलाएं दीपक? जानें नरक चतुर्दशी दीप दान का मुहूर्त, मंत्र
Narak chaturdashi 19 October 2025 Deepdaan Muhurat: नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली पर भी लोग घर के अलग-अलग स्थानों पर दीये लगाते हैं। जानें नरक चतुर्दशी पर कितने दीपक जलाने चाहिए और यम के नाम का दीपक किस दिशा में लगाना चाहिए।

Narak chaturdashi deep daan time 2025: हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस या छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार दीवाली से ठीक एक दिन पहले आता है। इस बार छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2025, रविवार को है। इस दिन गणेश-लक्ष्मी की पूजा करने के साथ कुछ जगहों पर सूर्यास्त के बाद यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। जबकि कुछ लोग धनतेरस के दिन यम दीपम जलाते हैं। जानें छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए, कहां-कहां दीपक रखना चाहिए और यम दीपम का शुभ मुहूर्त व मंत्र भी।
छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए: छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी के दिन यम दीपक के साथ कुल 14 दीये जलाना शुभ माना गया है। इन दीयों को पूजा घर, किचन, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, छत, बाथरूम व पानी के स्थान समेत घर के अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
नरक चतुर्दशी पर यम के नाम का दीपक किस दिशा में जलाएं: कहा जाता है कि यम दीप जलाने के बाद उसे पूरे घर में घुमाना चाहिए और फिर घर की दक्षिण दिशा में साफ स्थान पर रखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज की कृपा मिलती है और परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
छोटी दिवाली पर दीयों में तेल या घी किसका प्रयोग करते हैं: दिवाली पर दीयों में सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता है। यम दीप में भी सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा मंदिर में जलने वाले दीयों में घी का प्रयोग करना चाहिए।
नरक चतुर्दशी दीप दान का शुभ मुहूर्त 2025: नरक चतुर्दशी पर दीप दान के लिए शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 47 मिनट से शाम 06 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दीप दान के लिए शुभ मुहूर्त शाम 05:47 से शाम 07:03 बजे तक रहेगा।
यमराज के लिए दीपक जलाने का मंत्र क्या है: मृत्यु देवता यमराज के लिए दीपक जलाते समय “मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदशी दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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