Chaitra Navratri 2026 Day 1: नवरात्र के पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा, पढें कथा, पूजा विधि भोग और क्या वरदान मांगे
Navratri first day:19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह दिन स्थिरता, शक्ति, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सबसे पहले प्रतिपदा को कलश की स्थापना होती है।

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह दिन स्थिरता, शक्ति, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सबसे पहले प्रतिपदा को कलश की स्थापना होती है। इस दिन कलश स्थापना करके माता दुर्गा को घर में मंदिरों में बुलाया जाता है तथा माता से सुख समृद्धि आरोग्यता वैभव वैवाहिक जीवन में सुख की कामना की जाती है। यहां हम जानेंगे, माता का स्वरूप कैसा है, उनकी कैसे पूजा करनी चाहिए, उन्हें किस रंग का फूल चढ़ाना चाहिए।
●इस दिन माता को सफेद फूलों तथा सफेद मिष्ठान्न का भोग लगाया जाता है।
●इस दिन मूलाधार चक्र जागृत होता है।
●इस दिन कलश स्थापना विवाह से जुड़ी समस्याएं माता शैलपुत्री दूर करती हैं।
माता शैलपुत्री से जुड़े पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पूर्व जन्म में माता शैलपुत्री का नाम सती था तथा यह भगवान शिव की पत्नी थी। सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था। परिणामस्वरूप माता सती ने अपने आप को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर लिया था। अगले जन्म में माता सती ने शैल राज हिमालय की पुत्री के रूप में स्वयं को प्रकट किया । पर्वत राज हिमालय के घर पुत्री के रूप में माता ने जन्म लेने के कारण से माता दुर्गा के इस स्वरूप का नाम शैलपुत्री पड़ा । कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव से विवाह किया। माता दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम स्वरूप शैलपुत्री माता का है ।
माता शैल पुत्री का स्वरूप
- माता शैलपुत्री वृषभ पर सवार होती हैं।
- उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में पुष्प कमल होता है अर्थात कमल का पुष्प होता है।
- माता शैलपुत्री की पूजन से जीवन में स्थिरता तथा दृढ़ता का विकास होता है।ट
- माता सफेद वस्त्र धारण करती हैं।
- माता का सफेद पुष्प से श्रृंगार होता है।
- माता का यह स्वरूप सौभाग्य तथा शांति का प्रतीक है
देवी के पहले स्वरूप शैलपुत्री का पूजन कैसे करें
- नवरात्र के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा आराधना किया जाता है।
- नवरात्र के प्रथम दिन स्नान आज से निवृत होकर पूजा स्थल पर सभी प्रकार के पूजन सामग्री जैसे फूल, अक्षत, रोरी, चंदन, अबीर, गुलाल, फल, मिठाई, भोग, गाय का घी, दीपक आदि वस्तुएं लेकर बैठ जाना चाहिए।
- पंचमेवा, मिठाई रोली, सिंदूर, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, लौंग , घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, शर्करा ,, फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी की गांठ , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, , आरती की थाली. कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, तिल, माँ की प्रतिमा, आभूषण व श्रृंगार का सामान, फूल
- सबसे पहले सफेद आसन पर उत्तर मुंह करके स्थिर मन से माता के सम्मुख से बैठ जाते हैं।
- माता शैलपुत्री के सामने घी का दीपक जलते हैं।
- माता शैलपुत्री के चित्र या मूर्ति को लकड़ी के पटरी पर लाल अथवा सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करते हैं।
- पूजा स्थल में विद्यमान सभी देवी देवताओं को स्नान करने के उपरांत माता शैलपुत्री को स्नान करते हैं।
- माता शैलपुत्री को सफेद वस्त्र व सफेद पुष्प अर्पित करते हैं।
- फिर उपलब्ध सभी प्रकार की सामग्री क्रमशः माता को अर्पित करते हैं तथा सफेद मिठाई खीर आदि का भोग लगाते हैं।
- एक सबूत पान के पत्ते में इक्कीस फूलदार लौंग रखते हैं।
●माता शैलपुत्री की कृपा के विशेष मंत्र
●ॐ शं शैलपुत्री दैव्यै नमः
●या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां शैलपुत्री का पसंदीदा भोग कौन सा है:-
मा शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी से बनी मिठाई अति प्रिय है
सफेद वस्तुओं का भोग लगता है।
गाय के घी का भी भोग लगाना चाहिए।
मखाने का खीर माता को अति प्रिय है।
कुंवारी कन्याओं को प्रसाद वितरण करें।
मां शैलपुत्री से कौन सा वरदान पाएं जा सकते हैं
मां शैलपुत्री प्रसन्न होकर सुखी होने का , लंबी आयु तथा आरोग्यता का वरदान देती हैं।
माता शैलपुत्री निर्णय क्षमता, दृढ़ विश्वास तथा आत्म शक्ति का वरदान देती है।
एकाग्रता, मानसिक स्थिरता एवं शांति का वरदान देती हैं।
मां भगवती की कृपा से जीवन में सभी प्रकार के डर, भय, व्याधि, जरा पीड़ा तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होता है।-ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी के सौजन्य से




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