महिलाएं भगवान हनुमान की आरती कर सकती हैं या नहीं? जानें क्या बोलें प्रेमानंद महाराज
Premanand Maharaj: भगवान हनुमान की पूजा को लेकर कई तरह के राय हैं। कुछ का मानना है कि महिलाओं को इन्हें नहीं पूजना चाहिए तो कुछ इसके उलट बात करते हैं। जानिए अपने प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने इस पर क्या कहा है?

हिंदू धर्म में भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान हनुमान को सबसे शक्तिशाली और बलशाली माना जाता है। उन्हें भगवान शिव का ग्यारवां रुद्र अवतार कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा अर्चना से हर तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है। हालांकि इनकी पूजा को लेकर लोगों में इस बात को लेकर दो राय है कि महिलाओं को इनकी मूर्ति इत्यादि को हाथ नहीं लगाना चाहिए। हाल ही में वृदांवन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन के दौरान महिला श्रद्धालु ने पूछा कि क्या हम भगवान हनुमान को नहीं पूज सकते हैं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने जो जवाब दिया, उसे आप नीचे विस्तार से पढ़ें।
स्वंय शंकर हैं भगवान हनुमान
प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यदि आप भगवान मानते हैं तो भगवान के हम सब बच्चे हैं। चाहे स्त्री हो या पुरुष हो, ये शरीर है लेकिन अंश तो हम भगवान के ही हैं। तो हम क्यों नहीं भगवान हनुमान की पूजा करें। वो परम ब्रह्मचारी स्वरूप हैं ना तो इसलिए जो निषेध करने वाले जन है वो उसी ब्रह्मचर्य को लेकर हैं। पर वो भगवान हैं। वो कोई मनुष्य थोड़ी है। वो स्वंय शंकर हैं। ग्यारवें रुद्र का अवतार हैं। तो हमें ऐसा लगता है कि अराधना तो हर कोई कर सकता है लेकिन वंदनवार चढ़ाने आदि के लिए कोई प्रमाण नहीं पाया है। अपने हाथ से भगवान के शरीर को छूना इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है लेकिन हम भाव से कहते हैं कि हमारे वो भगवान हैं। हम हनुमान चालीसा पढ़ें। उनका नाम जप करें। हनुमान जी के लिए भोग की व्यवस्था करें।
इस तरह कर सकते हैं भगवान की पूजा
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि अगर घर में भगवान हनुमान विराजमान हैं तो रसोई बनाकर बढ़िया सुंदर भोग लगाइए। इस तरह से हम भगवान हनुमान की आराधना कर सकते हैं लेकिन वंदनवार आदि चढ़ाने का प्रमाण हमें नहीं मिला है इसलिए हम इस विषय में हां नहीं कह सकते हैं लेकिन आराधना तो की जा सकती है क्योंकि वो हमारे भगवान हैं। उन्होंने आगे कहा कि भोग लगाइए, भोग बनाइए, आरती करिए। उनकी जो अन्य सेवा है उसके लिए हम कुछ नहीं कह सकते हैं। उनका एक परम ब्रह्मचारी वाला स्वरूप है। हनुमान जी सबके हैं। तो ये शरीर धर्म की मर्यादा है और इसके अंतर्गत ही आता है सब। वंदनवार चढ़ाना आदि हमने कहीं नहीं पढ़ा है कि माता-बहनें चढ़ाएं।




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