Apara Ekadashi Vrat Ke Niyam kya hai Apara Ekadashi 2026 Date Time kab hai Ekadashi 13 मई को अपरा एकादशी, एकदशी व्रत के इन नियमों का पालन जरूरी, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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13 मई को अपरा एकादशी, एकदशी व्रत के इन नियमों का पालन जरूरी

Apara Ekadashi Vrat Ke Niyam, Apara Ekadashi 2026: इस साल ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी उदया तिथि में बुधवार को पड़ रही है। इस साल अपरा एकादशी पर प्रीति योग का संयोग बन रहा है। 

Sun, 10 May 2026 06:41 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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13 मई को अपरा एकादशी, एकदशी व्रत के इन नियमों का पालन जरूरी

Apara Ekadashi Vrat Ke Niyam, Apara Ekadashi 2026, अपरा एकादशी: हर महीने में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकदशी तिथि को व्रत रखा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस साल ज्येष्ठ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी उदया तिथि में बुधवार को पड़ रही है। इस साल अपरा एकादशी पर प्रीति योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है। अपरा एकदशी का व्रत रख रहें हो या नहीं, कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं अपरा एकादशी के दिन किन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।

13 मई को अपरा एकादशी, एकदशी व्रत के इन नियमों का पालन जरूरी

2026 में अपरा एकादशी कब से कब तक है?

हिंदू पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष, एकादशी 12 मई 2026 को दोपहर में 02:52 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 13 मई, 2026 को दोपहर में 01:29 मिनट पर होगा।

अपरा एकादशी व्रत में किन नियमों का पालन जरूरी माना जाता है?

एकादशी पर भोजन से जुड़े नियम

  • एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
  • व्रत से एक दिन पहले (दशमी तिथि को) और व्रत के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से परहेज करना चाहिए।
  • अपरा एकादशी के दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता है।
  • अगर आप पूरी तरह निर्जला (बिना पानी के) व्रत नहीं रख सकते, तो फल, दूध, पानी या कुट्टू का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं।

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तुलसी से जुड़े नियम

एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले दशमी को ही तोड़कर रख सकते हैं।

मन और शरीर से जुड़े नियम

  • व्रत का अर्थ केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर कंट्रोल करना भी है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दौरान मन और शरीर की पवित्रता बनाए रखें।
  • जुबान पर काबू रखें। इस दिन किसी की बुराई न करें। झूठ न बोलें और गुस्सा करने से बचें। जितना हो सके शांत रहें।
  • शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जुआ खेलना, चोरी करना या दूसरों की निंदा करना व्रत के फल को नष्ट कर देता है।

पूजा-पाठ से जुड़े नियम

  • एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है।
  • अगर संभव हो, तो एकादशी की रात को सोएं नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन में समय बिताएं।

पारण से जुड़े नियम

  • व्रत का समापन भी उतना ही जरूरी है जितनी की शुरुआत।
  • व्रत हमेशा अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही खोलना चाहिए।
  • पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें। हरि वासर (द्वादशी की पहली चौथाई अवधि) के दौरान व्रत नहीं खोलना चाहिए।
  • व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं या दान दे सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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