Apara ekadashi 2026: अपरा एकादशी व्रत से कौन-कौन से पाप खत्म हो जाते हैं, इसलिए जरूरी है अपरा एकादशी का व्रत
apara ekadashi 2026 date: ज्येष्ठ के कृष्ण पक्ष में अपरा एकादशी होती है। अगर आप भी व्रत रखते हैं, जो जान लें कि इस साल अपरा एकादशी का व्रत किस रखा जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई को दोपहर 09:56 बजे हो जाएगा।

ज्येष्ठ के कृष्ण पक्ष में अपरा एकादशी होती है। अगर आप भी व्रत रखते हैं, जो जान लें कि इस साल अपरा एकादशी का व्रत किस रखा जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई को दोपहर 09:56 बजे हो जाएगा। हिंदू धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की अराधना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो इस दिन व्रत करता है, वो जीवन में कई तरह के पापों से छुटकारा पाता है। यहां हम आपको उन पापों के बारे में बताएंगे, जो एकादशी व्रत के कारण छूट जाते हैं। अपरा एकादशी व्रत के पारण का समय 14 मई की सुबह 06:00 बजे से 07:41 बजे के बीच है। जबकि द्वादशी तिथि का समापन 14 मई की सुबह 7:41 बजे ही हो जाएगा।
अपरा एकादशी से कौन से पाप खत्म होते है?
पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में इस एकादशी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।पद्मपुराण में बताया गया है अपरा एकादशी का पर्व कितना जरूरी है। ऐसा कहा गया है कि हम जीवन में कई तरह के पाप करते हैं, लेकिन उनका एक सटीक हल है अपरा एकादशी का व्रत। ज्येष्ठ के कृष्ण पक्ष में अपरा एकादशी होती है। यह बहुत पुण्य प्रदान करनेवाली और बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है । आपको यह एकादशी कई प्रकार के पापों से बचाती है। इस एकादशी का व्रत करने से ब्रह्म हत्यासे दबा हुआ, गोत्र की हत्या करनेवाला, गर्भस्थ बालक को मारनेवाला, परनिन्दक पुरुष भी अपरा एकादशीके सेवन से निश्चय ही पापरहित हो जाता है। जो झूठी गवाही देता, माप-तोलमें धोखा देता, बिना जाने ही नक्षत्रों की गणना करता और कूटनीति से आयुर्वेद का ज्ञाता बनकर वैद्य का काम करता है--ये सब नरक में निवास करने कार्य बताए गए हैं। अपरा एकादशी के सेवन से ये भी पापरहित हो जाते हैं। अपरा एकादशीके व्रत से ऐसे मनुष्य भी सद्गति प्राप्त होती है।
कैसे करें पूजा
एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करें। पीले वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान को पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं। श्रीहरि को पीले फल, पुष्प और मिठाई का भोग लगाएं। यहां विशेष ध्यान रखना है कि विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल अनिवार्य है। इसके बिना भोग स्वीकार नहीं किया जाता।




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