Aaj Ka Vichar: पृथ्वी लोक पर कोई नहीं देता है साथ, यहां खुद लड़नी होती है अपनी लड़ाई,
श्रीमद्भगवतगीता सिर्फ एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि आज के समय में लोगों के लिए एक उचित मार्गदर्शक की तरह भी है। आज हम आपको गीता में लिखी 10 उपदेशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे प्रेरित होकर आप अपने जीवन को सफल और सुखद बना सकते हैं।

आज हर कोई सफल होना चाहता है, लेकिन सही दिशा में मार्गदर्शन ना होने की वजह से व्यक्ति भटकता रहता है। कहते हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति गीता के उपदेशों का पालन अपने जीवन में करता है, तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। श्रीमदभगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण की कही हर एक बात आज भी प्रसांगिक है। इसलिए श्रीमद्भगवतगीता सिर्फ एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि आज के समय में लोगों के लिए एक उचित मार्गदर्शक की तरह भी है। आज हम आपको गीता में लिखी 10 उपदेशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे प्रेरित होकर आप अपने जीवन को सफल और सुखद बना सकते हैं।
1. जीवन के भ्रम से ऊपर उठे
‘येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम्। ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः’ गीता के इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है और मन को शुद्ध रखता है, वह जीवन के भ्रम और उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर पूरे विश्वास और दृढ़ता के साथ भगवान का भजन करता है।
2. पुरुषार्थ करें
गीता में भगवान श्री कृष्ण मे संदेश दिया है कि व्यक्ति को कभी अपने भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए। भाग्य के भरोसे बैठे रहने से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होता है। ऐसे में हमेशा पुरुषार्थ करें, कहा गया है कि जो व्यक्ति मेहनत करता है उसका भाग्य भी साथ देता है। मनुष्य अपने पुरुषार्थ के दम पर भाग्य बदलने की ताकत रखता है। इसलिए कभी भी पुरुषार्थ करने से पीछे ना हटें।
3. बुद्धि और विवेक से करें हर कार्य
व्यक्ति को हर कर्म यानी कार्य अपनी बुद्धि और विवेक से करना चाहिए। ऐसा करने से उन्हें ना सिर्फ कार्य में सफलता मिलेगी बल्कि पहले से सोच-समझकर कार्य करने से मानसिक अशांति नहीं आती है। बुद्धि-विवेक के द्वारा किये गए कार्य सफल भी होते हैं और इससे मन में शांति भी बनी रहती है।
4. व्यर्थ की चिंता ना करें
गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो लोग अपने सभी धर्मों को त्यागकर ईश्वर की शरण लेते हैं, ऐसे मनुष्यों के सभी प्रकार के भय, कष्ट व चिंताएं भगवान हर लेते हैं। महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भी अपनी शरण में आने को कहा था। उन्होंने अर्जुन से कहा था, तुम सभी धर्मों को त्यागकर मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा। इसलिए व्यर्थ की चिंता ना करें।
5. अपनी लड़ाई स्वयं लड़ें
गीता के अनुसार इस धरती लोक पर कोई भी साथ नहीं देता है। अगर आपको सफल होना है, तो यहां आपको खुद ही अपनी लड़ाई लड़नी होग और खुद ही समझना होगा।
6. मोह से रहें दूर
श्रीमदभगवद्गीता के मुताबिक व्यक्ति को किसी चीज के प्रति मोह नहीं करना चाहिए। पर आज के समय में मोह करने वाली कई चीजें हैं, लेकिन गीता के मुताबि किसी भी चीज से जरुरत से ज्यादा लगाव व उसके प्रति मोह के कारण ही मन में उलझनें और तनाव उत्पन्न होते हैं। इसलिए ना किसी पर आश्रित रहें, ना ही किसी के प्रति मोह रखें।
अन्य उपदेश
7. जो बीत गया वो अच्छा हुआ, जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है, जो भी आगे होगा वो भी अच्छा होगा, इसलिए भविष्य की चिंता ना करें, वर्तमान में जिएं।
8. क्रोध के समय हर व्यक्ति को खुद पर थोड़ा नियंत्रण रखना चाहिए और गलती के समय थोड़ा झुक जाना चाहिए। यह तरीके अपनाने से दुनिया की सारी समस्याएं हल हो जाती है। क्रोध और अंहकार ये दोनों चीजें मनुष्य का विनाश कर देती हैं।
9. श्रीकृष्ण कहते हैं कि यदि गलत को गलत कहने की क्षमता नहीं है, तो आपकी प्रतिभा व्यर्थ है।
10. दुनिया में सबसे खुश वो लोग हैं जो यह जान चुके हैं कि दुसरों से किसी भी प्रकार की उम्मीद रखना व्यर्थ है। यह उम्मीद ही व्यक्ति के दुखों का कारण है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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